Sunday, 24 May 2026

लश्कर आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ का जयपुर कनेक्शन गहराया: फर्जी निकाह से पासपोर्ट बनवाकर विदेश फरार


लश्कर आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ का जयपुर कनेक्शन गहराया: फर्जी निकाह से पासपोर्ट बनवाकर विदेश फरार

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आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े संदिग्ध आतंकी उमर हारिस  उर्फ ‘खरगोश’ के मामले में जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनसे जयपुर कनेक्शन और गहरा हो गया है। जांच में सामने आया है कि उसने पहचान बदलकर ‘सज्जाद’ नाम से जयपुर में निकाह किया और इसी के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसने भारतीय पासपोर्ट बनवाया और बाद में देश छोड़कर फरार हो गया। एजेंसियों को आशंका है कि वह वर्तमान में सऊदी अरब में छिपा हुआ है।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, उमर हारिस वर्ष 2012 में पाकिस्तान से घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर में दाखिल हुआ था और लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों से बचते हुए घाटी में सक्रिय रहा। लगातार ठिकाने बदलने के कारण उसे ‘खरगोश’ कोडनेम दिया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने उत्तर कश्मीर के बांदीपोरा और श्रीनगर के विभिन्न इलाकों में पनाह ली और लश्कर के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क की मदद से अपनी गतिविधियां संचालित करता रहा।

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल का खुलासा Srinagar Police द्वारा किया गया, जिसने 5 संदिग्धों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े एक ‘सफेदपोश’ आतंकी नेटवर्क का भी इससे संबंध है। इस मॉड्यूल में पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा और उस्मान उर्फ खुबैब के नाम भी सामने आए हैं।

पूछताछ में अब्दुल्ला ने खुलासा किया कि उमर हारिस और उसके सहयोगी राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में सक्रिय रहे हैं। जयपुर में किए गए फर्जी निकाह के दस्तावेजों का इस्तेमाल पासपोर्ट आवेदन के लिए किया गया, जिससे वह वैध पहचान के साथ देश से बाहर निकलने में सफल रहा। इसके बाद वह पहले इंडोनेशिया पहुंचा और फिर 2024-25 के दौरान फर्जी ट्रैवल डॉक्यूमेंट के जरिए सऊदी अरब में ठिकाना बना लिया।

इस मामले ने दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में कहां चूक हुई और किन स्तरों पर लापरवाही या संभावित मिलीभगत हुई। साथ ही, इस पूरे इंटर-स्टेट और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विभिन्न एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही हैं।

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