



राजस्थान में लिपिक भर्ती-2013 से जुड़ा फर्जीवाड़ा एक बार फिर सुर्खियों में है। बीकानेर, अलवर, सीकर और हनुमानगढ़ जिलों के बाद अब जयपुर में भी बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। जिला स्तर पर एडीएम की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने 65 लिपिकों के दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ियां पाई हैं। इसके बाद इन कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिला परिषद जयपुर के एसीईओ शेर सिंह लुहाड़िया ने संबंधित लिपिकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिनके जवाब अब जांच समिति के समक्ष विचाराधीन हैं।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के शासन सचिव जोगाराम ने सभी जिलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों की जांच कर दोषी कर्मचारियों को सेवा से हटाया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों ने अब तक कार्रवाई नहीं की है, उनके खिलाफ भी चार्जशीट जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, जयपुर में इस भर्ती से जुड़े मामले की जांच के लिए पूर्व में तत्कालीन जिला कलक्टर जितेंद्र सोनी के निर्देश पर एडीएम स्तर की कमेटी गठित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता कुंतल विश्नोई ने की। कमेटी ने 1198 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 65 लिपिकों के दस्तावेज विधि मान्य नहीं पाए गए। इनमें 22 मामलों में कंप्यूटर प्रमाण पत्रों में भिन्नता मिली, 32 लिपिकों ने एक ही समय में दो डिग्रियां प्राप्त कीं, जबकि 11 के पास ऑफ-कैंपस स्टडी से जुड़े प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए।
इस बीच आरोप यह भी सामने आए हैं कि जिन कर्मचारियों के दस्तावेजों में खामियां मिली हैं, वे प्रभावशाली लोगों के जरिए कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही प्रशासनिक स्तर पर बदलाव हो गया, जिससे कार्रवाई प्रभावित हुई।
राज्य के अन्य जिलों में भी इसी भर्ती से जुड़े फर्जीवाड़े सामने आए हैं। बीकानेर में 49 लिपिकों के दस्तावेज अमान्य पाए गए थे, जबकि अलवर में 2022 की जांच में 134 लिपिकों की भर्ती में गड़बड़ी सामने आई। यहां तीन कर्मचारियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और भर्ती शाखा के एक कर्मचारी को निलंबित किया गया। सीकर और हनुमानगढ़ में भी दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आने के बावजूद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) से जांच क्यों नहीं कराई गई। विधानसभा में इस मामले की जांच SOG से कराने की घोषणा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा की गई थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश सामने नहीं आया है। जयपुर में संबंधित लिपिकों द्वारा नोटिस के जवाब जमा कर दिए गए हैं और जांच कमेटी इनका परीक्षण कर आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।