Sunday, 19 April 2026

पुष्कर में अंतरराष्ट्रीय परशुराम जन्मोत्सव: “ब्राह्मण से ही धर्म है”—ब्राह्मण समाज धर्म की मूल धुरी है : प्रखर महाराज


पुष्कर में अंतरराष्ट्रीय परशुराम जन्मोत्सव: “ब्राह्मण से ही धर्म है”—ब्राह्मण समाज धर्म की मूल धुरी है : प्रखर महाराज

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पुष्कर में आयोजित 43 दिवसीय शत गायत्री पुनश्चरण महायज्ञ के अंतिम पूर्णाहुति दिवस पर अंतरराष्ट्रीय परशुराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। गायत्री साधना केंद्र में हुए इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं, विद्वानों और समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रखर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्राह्मण समाज धर्म की मूल धुरी है, जो न केवल स्वयं धर्म का पालन करता है, बल्कि समाज को भी धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अनेक भ्रांतियों का निराकरण किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर आनंद भालेराव ने कहा कि भगवान परशुराम का चरित्र समस्त समाज के कल्याण की भावना से प्रेरित है और उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने सम्मानित विप्रजनों को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज के विचार और संस्कार समाज को सकारात्मक दिशा देने में सक्षम हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत श्यामसुंदर शरण देवाचार्य ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सुशील ओझा तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम संयोजक एवं पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा ने बताया कि इस आयोजन में हजारों ब्राह्मणों की उपस्थिति रही। मंच संचालन डॉ. रशिका महर्षि और मीना शर्मा ने किया, जबकि आभार महामंत्री देवेंद्र त्रिपाठी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को ‘विप्र गौरव’ और ‘विप्र शिरोमणि’ सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा गया। इनमें प्रसिद्ध सर्जन डॉ. कुलदीप शर्मा और विज्ञान क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त करने वाली डॉ. रश्मि शर्मा को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इस दौरान अनेक संत-महात्माओं और तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रों के साथ आयोजन को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया। बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज, साहित्यकार, कलाकार, चिकित्सक, इंजीनियर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिससे आयोजन को व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम मिला।

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