



राजस्थान में आगामी जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य सरकार बड़े प्रशासनिक फैसले की तैयारी में है। जनगणना कार्य में लगे लगभग 1.60 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर एक साल तक रोक लगाने का प्रस्ताव है। यह निर्णय 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है, ताकि फील्ड में कार्यरत स्टाफ की निरंतरता बनी रहे और सर्वे कार्य में कोई बाधा न आए।
जनगणना निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र भेजा गया है और जल्द ही इस पर औपचारिक आदेश जारी किए जा सकते हैं। जनगणना के पहले चरण में डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके तहत 1 से 15 मई तक आम नागरिक स्वयं पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस सेल्फ सेंसस प्रक्रिया में मकान और परिवार से जुड़े 33 सवालों के जवाब ऑनलाइन देने होंगे।
इसके बाद 16 मई से 14 जून के बीच प्रगणक (जनगणना कर्मचारी) घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन करेंगे और मकान लिस्टिंग का कार्य करेंगे। प्रत्येक ब्लॉक में लगभग 850 मकानों को शामिल किया जाएगा, जिसमें आवासीय भवनों के साथ कार्यालय और प्रतिष्ठान भी शामिल होंगे। यदि कोई मकान बंद मिलता है, तो प्रगणक 30 दिन के भीतर दोबारा जाकर उसकी स्थिति दर्ज करेंगे।
डिजिटल जनगणना प्रक्रिया में मोबाइल नंबर और ओटीपी आधारित सत्यापन अनिवार्य होगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जनगणना कर्मचारी ओटीपी नहीं मांगेगा, इसलिए लोगों को साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यह व्यापक प्रक्रिया राज्य के प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित करेगी, इसलिए तबादलों पर रोक का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल जनगणना कार्य में तेजी आएगी, बल्कि डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित हो सकेगी।