



सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित आरएएस अधिकारी हनुमानाराम विरड़ा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ में हुई, जहां राज्य सरकार की ओर से आरोपी के खिलाफ कड़ी दलीलें पेश की गईं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि आरोपी का कृत्य न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर हमला है, बल्कि लोक प्रशासन की नींव को भी कमजोर करता है। सरकार ने तर्क दिया कि यदि ऐसे व्यक्ति को, जो जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर चयनित हुआ है, जमानत दी जाती है तो यह पूरे तंत्र के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
मामले के अनुसार, हनुमानाराम विरड़ा पर आरोप है कि उन्होंने सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 और पटवारी भर्ती परीक्षा-2021 के विभिन्न चरणों में डमी कैंडिडेट के रूप में परीक्षा दी। यह मामला राज्य के बड़े भर्ती घोटालों में से एक माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हनुमानाराम को 9 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था। वे बाड़मेर जिले के बिसारणियां गांव के निवासी हैं और उन्हें RAS परीक्षा-2021 में 22वीं रैंक प्राप्त हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब आरोपी को राहत नहीं मिली है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत हिरासत में रहना होगा। यह फैसला भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे भविष्य में इस प्रकार के मामलों पर सख्ती का संदेश भी जाता है।