



केंद्र सरकार के महिला आरक्षण प्रस्ताव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में बुधवार को दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें राहुल गांधी सहित कई दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और महिला आरक्षण विधेयक तथा उससे जुड़े प्रस्तावित बदलावों पर रणनीति तैयार की गई।
केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह प्रस्ताव भारतीय संसदीय व्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।
सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को प्रस्तावित संसद के विशेष सत्र में इस संबंध में संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 अप्रैल को इस मुद्दे पर होने वाली बहस का जवाब दे सकते हैं।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक मतभेद भी उभरकर सामने आ रहे हैं। रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों में वृद्धि दक्षिणी राज्यों के लिए असंतुलन पैदा कर सकती है और यह प्रस्ताव उनके लिए स्वीकार्य नहीं है।
विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करते हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन और सीटों के पुनर्गठन को लेकर व्यापक चर्चा और सर्वसम्मति जरूरी है। महिला आरक्षण को लेकर जहां एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठा रहा है। आने वाले विशेष सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है।