



भ्रष्टाचार के मामलों में पहले से घिरे आईपीएस अधिकारी मनीष अग्रवाल के खिलाफ एक और कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। जम्मू-कश्मीर में 3 लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोपों से जुड़े 11 साल पुराने मामले में एसीबी (विजिलेंस) ने आरोपों को सही माना है। अब केंद्र सरकार ने इस मामले में चालान पेश करने की मंजूरी दे दी है, जिससे अग्रवाल की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
यह मामला उस समय का है जब मनीष अग्रवाल जम्मू-कश्मीर कैडर में कार्यरत थे और उधमपुर में डीएसपी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उनके रीडर युद्धवीर को एक शिक्षक से रिश्वत लेते हुए विजिलेंस टीम ने रंगे हाथों पकड़ा था। जांच के दौरान इस प्रकरण में अग्रवाल की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मनीष अग्रवाल के खिलाफ चालान पेश करने की मंजूरी दे दी थी। इसके बाद फाइल केंद्र सरकार को भेजी गई, जहां से मंजूरी मिलने में करीब 7 वर्ष का समय लग गया। इस प्रकार कुल मिलाकर 11 साल बाद इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ पाई है।
अब केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद मनीष अग्रवाल के खिलाफ संबंधित अदालत में चालान पेश किया जाएगा। यह मामला उनके खिलाफ पहले से चल रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के अतिरिक्त है। इससे पहले राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो भी उनके खिलाफ एक अन्य मामले में चालान पेश कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में दौसा जिले में एसपी रहते हुए मनीष अग्रवाल पर हाईवे निर्माण कंपनी से रिश्वत मांगने के आरोप लगे थे, जिसके चलते एसीबी ने उन्हें वर्ष 2021 में गिरफ्तार भी किया था। एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने मनीष अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत इन मामलों में आगे की कार्रवाई पर नजरें टिकी हुई हैं।