Tuesday, 14 April 2026

अंबेडकर जयंती पर सचिन पायलट का केंद्र और राज्य सरकार पर हमला: संविधान की अनदेखी और चुनाव टालने पर उठाए सवाल


अंबेडकर जयंती पर सचिन पायलट का केंद्र और राज्य सरकार पर हमला: संविधान की अनदेखी और चुनाव टालने पर उठाए सवाल

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जयपुर में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस की छत्तीसगढ़ प्रभारी और विधायक सचिन पायलट ने अंबेडकर जयंती के अवसर पर संविधान और मौजूदा राजनीतिक हालातों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का देश के प्रति योगदान अतुलनीय है और उन्होंने विषम परिस्थितियों में जो संविधान देश को दिया, वह आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। पायलट ने कहा कि आज के दौर में संविधान की मूल भावना को बनाए रखने की जरूरत पहले से अधिक है, क्योंकि कई बार उसके प्रावधानों की अनदेखी और अवमानना होती दिखती है।

पायलट ने कहा कि केवल औपचारिक रूप से संविधान को सम्मान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके सिद्धांतों को व्यवहार में लागू करना आवश्यक है। उन्होंने सरकारों में बैठे लोगों से आत्ममंथन करने का आह्वान करते हुए कहा कि क्या वे वास्तव में संविधान की भावना के अनुरूप कार्य कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्य संविधान के विपरीत होते हैं, तो यह बाबा साहेब के सपनों के साथ अन्याय है।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर पायलट ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से इसके पक्ष में रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक-तिहाई महिला आरक्षण बिल तैयार किए जाने का उल्लेख किया, जो उस समय पारित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यदि सरकार महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी, लेकिन प्रक्रिया के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने परिसीमन आयोग और जनगणना के नाम पर महिला आरक्षण को टालने की संभावनाओं पर चिंता जताई और इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक एवं संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की। पायलट ने कहा कि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन पर विचार हो सकता है, लेकिन इसे बहाना बनाकर निर्णय में देरी नहीं होनी चाहिए।

राजस्थान की स्थिति पर बोलते हुए पायलट ने पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में हो रही देरी पर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जानबूझकर टाले जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं। उन्होंने मनरेगा योजना के लगभग ठप होने और प्रशासनिक उदासीनता पर भी सवाल उठाए।

पायलट ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि राजधानी जयपुर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जो हालात हैं, वे चिंताजनक हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह लॉ एंड ऑर्डर को प्राथमिकता दे और अधिकारियों को निष्पक्ष कार्रवाई करने की स्वतंत्रता प्रदान करे।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल घोषणाएं करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करना जरूरी है। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिसे रोकना आवश्यक है। अंत में पायलट ने आगामी चुनावों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केरल में भारी मतदान बदलाव का संकेत है, जबकि असम में कांटे की टक्कर है और उन्हें विश्वास है कि कांग्रेस वहां बहुमत हासिल कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि देशभर में लोग वर्तमान शासन से असंतुष्ट हैं और बदलाव की ओर देख रहे हैं।

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