



बिहार की राजनीति में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव सामने आया है, जहां सम्राट चौधरी को पहले भाजपा और फिर एनडीए विधायक दल का नेता चुन लिया है। इसके साथ ही उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो गया है। सम्राट चौधरी राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं और उन्होंने सरकार बनाने का औपचारिक दावा भी पेश कर दिया है।
अब 15 अप्रैल को लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है, जो राज्य की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित एनडीए बैठक में दिलचस्प राजनीतिक दृश्य देखने को मिला। नीतीश कुमार स्वयं सम्राट चौधरी के प्रस्तावक बने और उन्होंने उन्हें माला पहनाकर समर्थन जताया। इस दौरान उन्होंने विधायकों से तालियां बजवाकर चौधरी के नेतृत्व को स्वीकार करने का संदेश दिया। जवाब में सम्राट चौधरी ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जिससे दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक सौहार्द का प्रदर्शन हुआ।
विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्होंने राजनीति नीतीश कुमार से सीखी है और उनके साथ काम करते हुए अनुभव प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य बिहार को और अधिक विकसित बनाना है और नीतीश कुमार के ‘समृद्ध बिहार’ के विजन को आगे बढ़ाना है।
इससे पहले नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वे सम्राट चौधरी और विजय चौधरी के साथ एक ही गाड़ी में राजभवन पहुंचे और राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेश जारी करते हुए नई सरकार को पूरा सहयोग देने की बात कही और राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बिहार में यह सत्ता परिवर्तन न केवल राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत है, बल्कि राज्य में नई नेतृत्व शैली और प्रशासनिक प्राथमिकताओं की शुरुआत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में नई सरकार के फैसलों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।