



बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं और विशेष रूप से वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। जयपुर के भवानी निकेतन परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने नगरीय क्षेत्रों में 200 ई-लाइब्रेरी खोलने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें डिजिटल संसाधनों तक आसानी से पहुंच मिल सके।
मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के युवाओं के लिए एक विशेष पहल की घोषणा करते हुए जयपुर के मूंडला स्थित अंबेडकर पीठ में आवासीय कोचिंग सेंटर स्थापित करने की बात कही। यह केंद्र उन छात्रों के लिए लाभकारी होगा जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से गुणवत्तापूर्ण कोचिंग प्राप्त नहीं कर पाते। इस कदम को सामाजिक न्याय और समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में अनुसूचित जाति और जनजाति पर होने वाले अत्याचारों में 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों और प्रयासों का परिणाम बताया। राजनीतिक तौर पर भी मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा बाबा साहेब के योगदान की अनदेखी की और उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने अपने कार्यकाल में नेहरू और इंदिरा गांधी को भारत रत्न से सम्मानित किया, लेकिन डॉ. अंबेडकर को यह सम्मान 1990 में मिला, जब केंद्र में भाजपा समर्थित सरकार थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल वंचित और पिछड़े वर्गों की बात करती है, लेकिन व्यवहार में उनकी नीतियां केवल राजनीतिक लाभ तक सीमित रहती हैं। मुख्यमंत्री ने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में संविधान की मूल भावना को कुचल दिया गया था और इसे देश कभी नहीं भूल सकता। कुल मिलाकर अंबेडकर जयंती के अवसर पर की गई ये घोषणाएं जहां एक ओर युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोलती हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य की राजनीति में सियासी बयानबाजी भी तेज कर गई हैं।