Saturday, 29 August 2026

जेजेएम घोटाले में 10 आरोपियों के खिलाफ 16 हजार पेज की चार्जशीट एसीबी कोर्ट में पेश, सुबोध का नाम नहीं, हाई कोर्ट में चुनौती, 21 अप्रैल को सुनवाई


जेजेएम घोटाले में 10 आरोपियों के खिलाफ 16 हजार पेज की चार्जशीट एसीबी कोर्ट  में पेश, सुबोध का नाम नहीं, हाई कोर्ट में चुनौती, 21 अप्रैल को सुनवाई

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जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित 960 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 16 हजार पेज की विस्तृत चार्जशीट एसीबी कोर्ट में पेश कर दी है। चार्जशीट को 54 लाल बंडलों में भरकर दो टेंपो ट्रेवलर के माध्यम से झालाना स्थित मुख्यालय से कोर्ट तक पहुंचाया गया, जो इस मामले की व्यापकता और गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि इस चार्जशीट में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल का नाम शामिल नहीं किया गया है, जबकि उन्हें पहले ही इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

चार्जशीट में खुलासा किया गया है कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम का दुरुपयोग किया। इसके जरिए उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए। जांच में सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ।

इसी बीच सुबोध अग्रवाल को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद एसीबी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की अतिरिक्त रिमांड पर भेज दिया गया। उनके वकील द्वारा पारिवारिक कारणों के आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत को कोर्ट ने खारिज कर दिया। वहीं अग्रवाल समेत 11 आरोपियों ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं, जिन पर 21 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है।

मामले में तीन मुख्य आरोपी—जितेंद्र शर्मा (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर), मुकेश गोयल (सुपरिटेंडेंट इंजीनियर) और संजीव गुप्ता—अब भी फरार हैं। कोर्ट ने इनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए हैं। चार्जशीट में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनमें केडी गुप्ता (चीफ इंजीनियर), दिनेश गोयल (तत्कालीन मुख्य अभियंता), डीके गौड, शुभांशु दीक्षित, अरुण श्रीवास्तव और अन्य शामिल हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ट्यूबवेल कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों निविदाओं में भाग लेकर करोड़ों के टेंडर हासिल किए। श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने 68 निविदाओं में हिस्सा लेकर 31 में एल-1 बनकर करीब ₹859 करोड़ के टेंडर प्राप्त किए, जबकि श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में भाग लेकर 73 में एल-1 बनकर ₹120 करोड़ से अधिक के टेंडर हासिल किए।

यह घोटाला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षीजल जीवन मिशन योजना से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। घोटाले के सामने आने के बाद एसीबी ने जांच शुरू की, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआईने भी इस मामले में कार्रवाई की। ईडी ने अपनी जांच पूरी कर सबूत एसीबी को सौंप दिए हैं। यह मामला अब राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक और वित्तीय घोटालों में शामिल हो गया है, जिसमें आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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