



टोंक। कांग्रेस नेता और कांग्रेस विधायक सचिन पायलट ने टोंक में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार, भाजपा और विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा केरल विधानसभा चुनाव जल्द घोषित करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यकाल मई तक था, इसके बावजूद जल्दबाजी में चुनाव घोषित कर तीन राज्यों के चुनाव एक साथ कर दिए गए, जिससे विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि केरल में कांग्रेस और यूडीएफ ने मजबूती से चुनाव लड़ा है और स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने का भरोसा जताया।
असम की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए पायलट ने कहा कि वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भाजपा नेता आरोप लगाते हैं तो ठीक माना जाता है, लेकिन सवाल पूछे जाने पर प्रतिक्रिया तीखी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई के मामलों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
पायलट ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों से असम और 12 वर्षों से केंद्र में सरकार होने के बावजूद घुसपैठ के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि भय और ध्रुवीकरण की राजनीति के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बार बंगाल में सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जो पार्टी के लिए अपनी ताकत दिखाने का बड़ा अवसर है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे वहां चुनाव प्रचार करेंगे।
राजस्थान की स्थिति पर बोलते हुए पायलट ने किसानों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के उस बयान की आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि किसान साल में केवल कुछ ही दिन काम करता है। पायलट ने कहा कि किसान पूरे वर्ष मेहनत करता है और देश की रीढ़ है, इसलिए उसके सम्मान और मदद के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग भी की।
उन्होंने राज्य सरकार पर विकास कार्यों में ठहराव का आरोप लगाते हुए कहा कि गांवों में न तो निर्माण कार्य हो रहे हैं और न ही योजनाएं आगे बढ़ रही हैं। मनरेगा जैसे कार्यक्रम भी प्रभावित हैं। साथ ही उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराने पर सरकार को घेरते हुए कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया को रोकना गलत है और सरकार जनता के आक्रोश से डर रही है। सरकार और संगठन के बीच समन्वय की कमी पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि प्रशासनिक तंत्र हावी हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने गलत किया है तो उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन कार्रवाई निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।