



जयपुर। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में प्रशासनिक कार्यों को सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों के बीच विभागों और संभागों का विस्तृत बंटवारा कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था में जितेंद्र कुमार सोनी को सबसे अधिक और महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे उनकी भूमिका CMO में और अधिक प्रभावशाली हो गई है।
जितेंद्र कुमार सोनी अब पीएचईडी, भूजल विभाग (GWD), जल संसाधन, इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP), कमांड एरिया डेवलपमेंट (CAD), लोक निर्माण विभाग (PWD), ऊर्जा, सूचना एवं जनसंपर्क, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD), मोटर गैराज, एस्टेट, सिविल एविएशन, कैबिनेट, कार्मिक विभाग (DOP), परिवहन और मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से जुड़े कार्य देखेंगे। इसके साथ ही उन्हें जयपुर संभाग का भी प्रभार सौंपा गया है।
वहीं सिद्धार्थ सिहाग को भरतपुर संभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनके पास उद्योग, एमएसएमई, खादी, बीआईपी, ईएसआईसी, रीको, विधि, खान एवं पेट्रोलियम, गृह, पुलिस, होमगार्ड, सतर्कता, जेल, सिविल डिफेंस, RSBI, वन एवं पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और CMIS जैसे अहम विभाग होंगे।
कपिल शर्मा को कोटा और बीकानेर संभाग का जिम्मा सौंपा गया है। इसके साथ ही वे मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों, बैठकों की तैयारियों, विजिटर्स और जनसुनवाई से जुड़े कार्यों का समन्वय भी करेंगे। जगबीर सिंहको जोधपुर संभाग का प्रभार दिया गया है, जहां वे आपदा प्रबंधन, राहत एवं पुनर्वास, पशुपालन, डेयरी, कृषि, सहकारिता, खाद्य एवं आपूर्ति, चुनाव और आरटीआई जैसे विभागों का कार्य देखेंगे।
इसी क्रम में उत्सव कौशल को उदयपुर और अजमेर संभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनके पास यूडीएच, स्थानीय स्वशासन (LSG), ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, पुरातत्व, देवस्थान और CMO के सामान्य प्रशासन से जुड़े कार्य होंगे।
अन्य वरिष्ठ अधिकारियों मेंअमिता शर्मा को वित्त एवं कर, आबकारी, अल्प बचत, स्टेट इंश्योरेंस, जीपीएफ, आयोजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, युवा एवं खेल, सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सौंपे गए हैं। वहीं संयुक्त सचिव अनु राजपाल को चिकित्सा, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।
उप सचिव जयप्रकाश नारायण को महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक, राजस्व, सैनिक कल्याण और शांति एवं अहिंसा जैसे विभागों का कार्यभार सौंपा गया है।
यह व्यापक पुनर्गठन प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने और निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यक्षमता में वृद्धि की उम्मीद है।