



जयपुर। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध हालातों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद संबोधन पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान को “देर से आए पर दुरुस्त नहीं आए” करार देते हुए कहा कि उनके भाषण में कोई ठोस समाधान या नई जानकारी नहीं थी, जिससे देशवासियों को राहत मिल सके।
जूली ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां ढुलमुल और अदूरदर्शी हैं, जिसके चलते देश ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को एलपीजी आपूर्ति और उससे प्रभावित गरीबों, किसानों और मजदूरों के लिए स्पष्ट रणनीति बतानी चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए नोटबंदी और कोरोना काल की व्यवस्थाओं को भी निशाने पर लिया। जूली ने कहा कि कोविड-19 के दौरान देश में ऑक्सीजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जबकि सरकार अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रही।
इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने समय-समय पर सरकार को चेताया, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया।
विदेश नीति के मुद्दे पर भी जूली ने सरकार को घेरा और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत स्थिति में था, जबकि वर्तमान में सरकार पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के आरोप लग रहे हैं।
उन्होंने पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए राजस्थान के युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। जूली ने कहा कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सरकार को और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।