


सवाई माधोपुर। रणथंभौर टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हेबिटेट (सीटीएच) क्षेत्र के पास होटल निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जहां सीटीएच नियमों के तहत निर्माण पर सख्त प्रतिबंध है, वहीं बाउंड्री से महज 250 मीटर दूरी पर होटल निर्माण की अनुमति दे दी गई और काम भी शुरू हो गया।
बताया जा रहा है कि इस निर्माण के लिए वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं ली गई थी, इसके बावजूद यूआईटी सचिव ने निर्माण की मंजूरी दे दी, जबकि जिला प्रशासन भी इस पर मौन रहा। मामला सामने आने के बाद तीनों एजेंसियां सक्रिय हुईं और जांच शुरू की गई।
गुमनाम शिकायत मिलने पर रणथंभौर के डीएफओ ने वन नियमों का हवाला देते हुए कलेक्टर को पत्र लिखा। इसके बाद कलेक्टर ने यूआईटी सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए। विवाद बढ़ने पर यूआईटी सचिव ने निर्माण स्वीकृति वापस लेते हुए काम रुकवा दिया। अब पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
यह मामला आलनपुर क्षेत्र के खसरा नंबर 3346/650, 649 एवं 652 की करीब 20 हजार वर्गमीटर भूमि से जुड़ा है। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2024 में वन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान, बाघ संरक्षण क्षेत्र और उनके बफर जोन में वन विभाग की एनओसी के बिना किसी भी प्रकार का भू-उपयोग परिवर्तन या व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित है।
राज्य सरकार ने रणथंभौर, सरिस्का, जवाई और कुम्भलगढ़ जैसे संरक्षित क्षेत्रों की अधिसूचित सीमा से एक किलोमीटर तक होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद इस मामले में नियमों की अनदेखी कर निर्माण स्वीकृति दिए जाने पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही वन विभाग से एनओसी न होने की जानकारी मिली, निर्माण कार्य तत्काल रुकवा दिया गया। अब जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।