



जयपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर का एक बार फिर विवादित बयान चर्चा में आ गया है। जयपुर के कनोडिया कॉलेज में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर अपने पुराने “नीच” वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कभी “नीच जाति” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उनका आशय “नीच किस्म के आदमी” से था।
अय्यर ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और इसे जाति से जोड़कर विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री की जाति पर नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और आचरण पर टिप्पणी की थी।
अय्यर ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे “गलत अफवाहें फैलाकर और झूठ बोलकर सत्ता में आए हैं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में सांप्रदायिक माहौल बढ़ाने में सरकार की भूमिका रही है।
अय्यर ने अपने भाषण में देश की सामाजिक और धार्मिक विविधता पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी बहुलता में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी एक धर्म या समुदाय को श्रेष्ठ बताने की सोच को बढ़ावा दिया गया, तो इससे देश की एकता और अखंडता पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को “पाकिस्तान जाओ” कहना गलत है और यह देश सभी धर्मों और समुदायों का है। अय्यर ने यह भी कहा कि सरकार का कोई धर्म नहीं होना चाहिए और धर्म तथा राष्ट्र को एक साथ जोड़ना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
अय्यर के इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और उनके बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।