



जयपुर। राजस्थान में 113 नगरीय निकायों के चुनाव को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार द्वारा चुनाव टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद लोढ़ा ने वहां कैविएट दाखिल की है। इस कैविएट में उन्होंने आग्रह किया है कि यदि सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो तो उन्हें भी पक्षकार के रूप में सुना जाए।
संयम लोढ़ा ने कहा कि राज्य सरकार किसी न किसी तरीके से नगरीय निकायों के चुनाव टालने का प्रयास कर रही है, जबकि इन निकायों के चुनाव पहले से ही देरी से हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान वे सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए यह बताएंगे कि चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। सरकार का कहना है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 309 में से 113 नगरीय निकायों के वार्डों के परिसीमन को निरस्त कर दिया है। हालांकि इन निकायों में वार्डों की संख्या में बदलाव नहीं किया गया था, लेकिन वार्डों की आंतरिक सीमाओं में बदलाव किया गया था। हाईकोर्ट ने इस बदलाव को अमान्य कर दिया, जिसके चलते परिसीमन की प्रक्रिया को फिर से पूरा करने के लिए सरकार को अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को करीब 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि प्रदेश में 15 अप्रैल तक पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराए जाएं। साथ ही सरकार को 31 दिसंबर तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया गया था।
इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। अब सरकार की ओर से समय बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है, जिसके मद्देनजर संयम लोढ़ा ने कैविएट दाखिल कर अपना पक्ष रखने की तैयारी की है।