



अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन भी तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और मिडिल ईस्ट क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। बढ़ते संघर्ष के मद्देनज़र भारत सरकार भी सतर्क हो गई है। इसी क्रम में रविवार रात करीब 9:30 बजे प्रधानमंत्री आवास पर उच्चस्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वेस्ट एशिया के मौजूदा हालात, वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित आपात स्थितियों से निपटने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
सूत्रों के अनुसार बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मिडिल ईस्ट के देशों में रह रहे भारतीयों और वहां फंसे लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो निकासी और राहत अभियानों की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। फिलहाल वेस्ट एशिया का एयरस्पेस लगभग बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा है, जिससे आवाजाही और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उनकी संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बातचीत हुई है। भारत ने UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है और इस कठिन समय में उसके साथ खड़े रहने का भरोसा जताया है। प्रधानमंत्री ने UAE सरकार का वहां रह रहे भारतीय समुदाय का ध्यान रखने के लिए आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने, शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी फोन पर बात की। बातचीत के दौरान हालिया घटनाक्रमों पर भारत की गंभीर चिंता व्यक्त की गई और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया। भारत ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि दुश्मनी और संघर्ष को जल्द समाप्त कर कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और संबंधित देशों के संपर्क में है, ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित कदम उठाए जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है, इसलिए भारत संतुलित और जिम्मेदार कूटनीतिक रुख अपनाते हुए शांति की अपील कर रहा है।