



राजस्थान विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान गुरुवार को राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार और मंत्रियों पर तीखे आरोप लगाए, जिसके चलते सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बन गई। बहस के दौरान शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के साथ डोटासरा की तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
डोटासरा ने पंचायत चुनावों को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब SIR की सूची सरकार के मुताबिक नहीं आई तो पुरानी सूची से चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार SIR प्रक्रिया में बेईमानी नहीं कर सकी। इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि डोटासरा को प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं है और सरकार पूरी मजबूती से चुनाव जीतकर आएगी। जवाब में डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगी और पंचायत व नगर निकाय चुनावों में सरकार का सूपड़ा साफ करेगी।
बहस के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत टिप्पणियों का दौर भी चला। जोगाराम पटेल ने कांग्रेस पर होटल राजनीति और बिड़ला ऑडिटोरियम की घटनाओं का उल्लेख करते हुए हमला बोला, जिस पर डोटासरा ने पलटवार करते हुए पुराने राजनीतिक विवादों का जिक्र किया। दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी से सदन का माहौल कई बार तनावपूर्ण हो गया।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने डोटासरा पर पलटवार करते हुए मिड डे मील से जुड़े लगभग 2000 करोड़ रुपए के मामले का जिक्र किया और जांच की बात कही। इस पर डोटासरा ने जांच का स्वागत करते हुए मंत्री पर लंबित मामलों का हवाला दिया और कहा कि यदि उन्हें जमानत नहीं मिली होती तो वे जेल में होते। जवाब में दिलावर ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों को राजनीतिक साजिश बताया, जबकि सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि हाईकोर्ट से बेल मिलना अपराध नहीं होता।
बहस के दौरान डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा कि पंचायतीराज मंत्रालय डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को दे दिया जाए ताकि वे छापेमारी कर हलचल मचा सकें। इस पर जवाब देते हुए डॉ. किरोड़ी मीणा ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में राष्ट्रभक्ति सीखी है और वे पद के पीछे नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य समाज को साथ लेकर विकास करना है।
सदन में उस समय फिर माहौल गर्म हो गया जब डोटासरा ने मंत्रियों पर व्यंग्य करते हुए यह टिप्पणी कर दी कि शिक्षा मंत्री गाय का दूध पीकर बड़े हुए हैं या भैंस का। इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह सदन की गरिमा के अनुरूप चर्चा नहीं है। इसके बाद कांग्रेस और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस और तंज का दौर जारी रहा। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने भी व्यंग्य करते हुए कहा कि मंत्री द्वारा गाय का दूध पीने की बात बुद्धिमत्ता के संदर्भ में कही गई थी।
पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप, राजनीतिक कटाक्ष और व्यक्तिगत टिप्पणियों से विधानसभा का माहौल गरमाया रहा। अनुदान मांगों पर चर्चा के बीच कई बार व्यवधान की स्थिति बनी, जिससे सदन की कार्यवाही भी प्रभावित होती नजर आई।