



राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान मंगलवार को प्रदेश में बढ़ते गैंगस्टर नेटवर्क और व्यापारियों तथा आम नागरिकों को मिल रही धमकियों का गंभीर मुद्दा उठाया गया। निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने सदन में कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था के लिए गैंगस्टर गतिविधियां बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशों में बैठे गैंगस्टर और जेलों में बंद अपराधी इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से व्यापारियों, डॉक्टरों और प्रतिष्ठित लोगों को रंगदारी के लिए धमका रहे हैं, जिससे समाज में भय का माहौल बन गया है।
विधायक भाटी ने कहा कि अब स्थिति ऐसी हो चुकी है कि छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक किसी भी व्यक्ति को धमकी मिलना आम बात बन गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति की परचून की दुकान भी ठीक से चल रही है तो उसे भी गैंगस्टरों की ओर से कॉल आ रही है। इन धमकियों के कारण व्यापारी मानसिक दबाव में जी रहे हैं। कई लोग अपनी दुकान या प्रतिष्ठान तक जाने से डर रहे हैं, वहीं उनके बच्चों की पढ़ाई और परिवार की सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि धमकी मिलने के बाद पूरा परिवार घरों में कैद होकर रहने को मजबूर हो जाता है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
भाटी ने सदन में यह भी सवाल उठाया कि धमकी मिलने के बाद प्रशासन अक्सर पीड़ित के घर के बाहर दो पुलिसकर्मी तैनात कर देता है, लेकिन इसके बावजूद गैंगस्टर फोन करके चुनौती देते हैं कि पुलिस सुरक्षा उन्हें नहीं बचा सकती। उन्होंने आशंका जताई कि प्रदेश में गैंगस्टरों का मजबूत स्थानीय नेटवर्क सक्रिय है, जो पीड़ितों और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी अपराधियों तक पहुंचा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे स्थानीय सहयोगियों और नेटवर्क की पहचान कर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त किया जाए।
निर्दलीय विधायक ने संगठित अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े लोगों की संपत्ति जब्त की जानी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेश में अपराध का दायरा और बढ़ सकता है। भाटी ने कहा कि नाबालिग बच्चों तक को अपराध की दुनिया में शामिल किया जा रहा है, जो समाज के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार और मुंबई की तर्ज पर संगठित अपराध के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई से ही सख्त संदेश जाएगा और आम जनता में विश्वास कायम होगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान को “रक्तरंजित प्रदेश” बनने से बचाने के लिए चुन-चुन कर बदमाशों पर कार्रवाई करना समय की मांग है।
महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट पर विधानसभा में सियासी टकराव, खर्च को लेकर दीया कुमारी और टीकाराम जूली आमने-सामने राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट के विकास कार्यों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। पर्यटन से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और डिप्टी सीएम एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी आमने-सामने आ गए। चर्चा उस समय तेज हो गई जब परियोजना पर घोषित बजट और वास्तविक खर्च के बीच बड़े अंतर का मुद्दा उठाया गया। महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट से संबंधित प्रश्न भाजपा विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने सदन में पूछा था। इसके जवाब में पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने बताया कि परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य शुरू किया जा चुका है और योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन विकास को लेकर गंभीर है और ऐतिहासिक विरासत स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि जवाब के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 के बजट में महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट के लिए 100 करोड़ रुपए की घोषणा की गई थी, लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद केवल 2 लाख 83 हजार रुपए ही खर्च किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी घोषणा के बावजूद जमीनी स्तर पर काम क्यों शुरू नहीं हुआ और परियोजना कब तक पूरी होगी। जूली के सवालों पर डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने पलटवार करते हुए पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने कई पर्यटन परियोजनाओं की घोषणाएं तो कीं, लेकिन उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए ठोस योजना नहीं बनाई गई थी। वर्तमान सरकार पहले योजनाओं को व्यवस्थित कर रही है और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा कर आगे बढ़ रही है। सदन में कुछ समय के लिए माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। विपक्ष ने परियोजना में देरी को सरकार की कार्यशैली से जोड़ते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की, जबकि सरकार ने इसे प्रक्रियात्मक चरण बताते हुए जल्द ही विकास कार्यों में तेजी आने का भरोसा दिलाया। महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट को मेवाड़ क्षेत्र के ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण योजना माना जा रहा है। ऐसे में परियोजना की प्रगति और बजट खर्च को लेकर विधानसभा में हुई बहस ने पर्यटन विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है। महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट पर बहस के बीच सदन में हंगामा, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने जताई नाराजगी राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट को लेकर चल रही बहस के दौरान सदन का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया। डिप्टी सीएम एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच परियोजना पर खर्च और प्रगति को लेकर तीखी चर्चा चल रही थी, तभी कांग्रेस विधायकों की ओर से लगातार टोकाटाकी शुरू हो गई। इस दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह डोटासरा भी अपनी बात रखने के लिए खड़े हो गए, जिससे सदन में शोर-शराबे की स्थिति बन गई। लगातार व्यवधान के बीच विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने हस्तक्षेप करते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित तरीके से चलने दिया जाए और अनावश्यक रूप से बार-बार खड़े होकर व्यवधान उत्पन्न करना उचित नहीं है। स्पीकर ने कहा कि यदि परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है तो स्वाभाविक रूप से आगे काम शुरू होगा, ऐसे में बार-बार एक ही विषय पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। स्पीकर देवनानी की टिप्पणी के बाद कुछ देर के लिए सदन में व्यवस्था बहाल हुई और कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। हालांकि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तकरार साफ दिखाई दी। विपक्ष जहां परियोजना में देरी और कम खर्च को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था, वहीं सरकार प्रक्रियागत कार्य पूरे होने के बाद विकास कार्य शुरू होने का भरोसा दिला रही थी। महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट को लेकर विधानसभा में हुई यह बहस राज्य की पर्यटन नीतियों और बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन पर चल रही व्यापक राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई है।