Tuesday, 24 February 2026

पुष्कर कथा में पं. धीरेन्द्र शास्त्री का बयान: ‘सनातन धर्म महान, धर्म पर गर्व करना सीखें’


पुष्कर कथा में पं. धीरेन्द्र शास्त्री का बयान: ‘सनातन धर्म महान, धर्म पर गर्व करना सीखें’

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अजमेर जिले के पुष्कर स्थित नए मेला मैदान में आयोजित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान आरती से हुई, जिसके बाद भजन-कीर्तन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए। कथा पांडाल में राजस्थान सहित देशभर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां धार्मिक प्रवचन के साथ सनातन धर्म की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की गई।

अपने संबोधन में पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने सनातन धर्म की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन परंपरा विश्व की सबसे महान आध्यात्मिक व्यवस्था है, जिसमें महिलाओं को पूज्य स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में भगवान राम के साथ माता सीता का नाम पहले लिया जाता है और “सीताराम” कहा जाता है, जो नारी सम्मान की परंपरा को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से अपने धर्म और परंपराओं पर गर्व करने का आह्वान करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी जड़ों और पूर्वजों से जुड़े रहना चाहिए।

शास्त्री ने पुष्कर की धार्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंचतीर्थों में पुष्कर का विशेष स्थान है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार देवताओं के गुरु बृहस्पति माने जाते हैं, उसी प्रकार तीर्थों का गुरु पुष्कर है। उन्होंने प्रयागराज और पुष्कर दोनों को तीर्थराज बताते हुए कहा कि प्रयागराज में तीन नदियों का संगम है, जबकि पुष्कर में त्रिदेवों का आध्यात्मिक संगम माना जाता है। उनके अनुसार पुष्कर में एक रात ठहरने मात्र से भी मनुष्य के पापों का क्षय होता है और यह स्थान पूर्वजों से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

कथा के दौरान उन्होंने लोगों से धार्मिक स्थलों पर आने और अपनी आस्था को मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने अजमेर क्षेत्र के लोगों से विशेष रूप से पुष्कर आने का आग्रह करते हुए इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया।

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