



जयपुर। राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान दिव्यांगों को स्कूटी वितरण और सरकारी स्कूलों में विज्ञान संकाय से जुड़े सवालों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और जमकर हंगामा देखने को मिला। सदन में कई बार तल्ख टिप्पणियां, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोकझोंक के कारण माहौल गरमा गया।
दिव्यांग स्कूटी वितरण योजना से जुड़े प्रश्न पर भाजपा विधायक कैलाश वर्मा ने अधिकारियों की लापरवाही के कारण समय पर स्कूटी वितरण नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूरक प्रश्न के माध्यम से सरकार से जवाब मांगा कि देरी के लिए जिम्मेदार कौन है। इस पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय हुई देरी का हवाला देते हुए आश्वासन दिया कि अब समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा।
इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पूरक प्रश्न पूछने के लिए खड़े हुए तो सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने उन्हें टोक दिया, जिससे विवाद शुरू हो गया। जूली ने स्पीकर से शिकायत करते हुए कहा कि उन्हें बार-बार बोलने से रोका जाता है और पूरक प्रश्न पूछने का अवसर सभी सदस्यों के लिए खुला होना चाहिए। मंत्री अविनाश गहलोत की ओर से यह टिप्पणी किए जाने पर कि “पूर्व मुख्यमंत्री सदन में हैं, इसलिए जूली और डोटासरा के बीच प्रतियोगिता चल रही है”, विपक्ष भड़क गया। जूली ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीतिक टिप्पणी के बजाय सवाल का तथ्यात्मक जवाब दिया जाए और सदन की गरिमा बनाए रखी जाए। जवाब में मंत्री ने कहा कि तेज बोलने से झूठ सच नहीं हो जाता।
प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा विभाग से जुड़े मुद्दे पर भी जोरदार हंगामा हुआ। सरकारी स्कूलों में विज्ञान संकाय खोलने और शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस शासनकाल पर तीखा हमला बोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने हजारों अंग्रेजी स्कूल और विज्ञान संकाय तो खोल दिए, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ।
मंत्री दिलावर के राजनीतिक आरोपों पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और तथ्यात्मक आंकड़े देने की मांग की। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने भी मंत्री को प्रश्न के दायरे में रहकर जवाब देने की सलाह दी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि शिक्षा मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं और जो पूछा गया है उसी का स्पष्ट उत्तर दिया जाना चाहिए। इसके जवाब में मंत्री ने बताया कि सरकार ने अलग-अलग चरणों में 3880 और 970 पदों पर नियुक्तियां की हैं।
बहस के दौरान शिक्षा मंत्री ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर ट्रांसफर पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए, जिससे सदन का माहौल और अधिक गर्मा गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे और प्रश्नकाल राजनीतिक बहस में बदलता नजर आया।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि आगामी सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तीखी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
बीकानेर रेप-हत्या केस पर विधानसभा में हंगामा, सत्ता-विपक्ष में तीखी बहस के बाद कांग्रेस का वॉकआउट
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान बीकानेर में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस और बीजेपी विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और विरोध जताते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
शून्यकाल में कांग्रेस विधायक डूंगरराम गेदर ने बीकानेर की नाबालिग बच्ची से रेप और हत्या की घटना को गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। इसके जवाब में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि मामले की जांच जारी है और पुलिस पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि नाबालिग का शव मॉर्च्युरी में रखा गया है तथा बीकानेर के पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों की गिरफ्तारी कब होगी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपराध नियंत्रण पर उतना ही ध्यान देती जितना राजनीतिक मुद्दों पर देती है तो ऐसी घटनाएं नहीं होतीं। जूली ने प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जताई।
नेता प्रतिपक्ष के बयान पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस संवेदनशील मामले पर राजनीति कर रहा है। इसके बाद गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि गंभीर आपराधिक घटना पर राजनीतिक बयान देना “ओछी राजनीति” है। इस टिप्पणी से विपक्ष और अधिक नाराज हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
जूली ने जवाब देते हुए कहा कि अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग करना राजनीति नहीं बल्कि जनता की आवाज उठाना है। लगातार बढ़ती नोकझोंक के बीच नेता प्रतिपक्ष ने विरोध स्वरूप वॉकआउट की घोषणा कर दी, जिसके बाद कांग्रेस विधायक सदन से बाहर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा का माहौल काफी देर तक गरमाया रहा और कानून-व्यवस्था तथा महिला सुरक्षा का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।