Saturday, 21 February 2026

CJI सूर्यकांत बोले—मेरे नाम से बन रही फर्जी वेबसाइट्स, साइबर क्राइम की कोई सीमा नहीं, ‘डिजिटल अरेस्ट’ को बताया डकैती


CJI सूर्यकांत बोले—मेरे नाम से बन रही फर्जी वेबसाइट्स, साइबर क्राइम की कोई सीमा नहीं, ‘डिजिटल अरेस्ट’ को बताया डकैती

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जयपुर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि साइबर क्राइम अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है और इसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं रही। जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय साइबर सिक्योरिटी सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके नाम से लगातार फर्जी वेबसाइट्स बनाई जा रही हैं और उनका दुरुपयोग किया जा रहा है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि लगभग हर दूसरे दिन उनके नाम से नई वेबसाइट सामने आ जाती है, जिनमें सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता है। उनके शुभचिंतक उन्हें मोबाइल पर संदेश भेजकर इन फर्जी साइट्स की जानकारी देते रहते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी वेबसाइट्स से लोगों को अलग-अलग प्रकार के संदेश भेजे जा रहे थे। एक बार उनके परिवार के सदस्यों—बहन और उनकी बेटी समान एक वकील—को भी उनके नाम से संचालित साइट से मैसेज प्राप्त हुए। सौभाग्य से संदेशों की भाषा आपत्तिजनक नहीं थी, लेकिन यह घटना साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि मामले की तुरंत साइबर क्राइम एजेंसियों को सूचना दी गई, जिसके बाद जांच में सामने आया कि ये सभी वेबसाइट्स नाइजीरिया से संचालित हो रही थीं। उन्होंने कहा कि यही साइबर अपराध की सबसे बड़ी चुनौती है—अपराधी किसी दूसरे देश में बैठकर लोगों को निशाना बना सकते हैं, जिससे जांच और कार्रवाई जटिल हो जाती है।

साइबर अपराधों के नए स्वरूप पर बोलते हुए सीजेआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ को जबरन वसूली और डकैती जैसा अपराध बताया। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में एक बुजुर्ग दंपती का मामला आया, जिनकी जीवनभर की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में साइबर ठगी के जरिए लूट ली गई। इस मामले में उन्होंने स्वतः संज्ञान लिया और व्यक्तिगत रूप से इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ न्यायपालिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि देशभर में साइबर अपराध के जरिए आम लोगों से लगभग 55 हजार करोड़ रुपए की ठगी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इसे सामान्य अपराध नहीं बल्कि “लूट” कहा जाना चाहिए, क्योंकि यह संगठित तरीके से लोगों की मेहनत की कमाई छीनने का मामला है।

सेमिनार में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी ने भी साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अदालतों को बार-बार बम की धमकियां मिल रही हैं, जिसके कारण न्यायिक कार्यवाही बाधित होती है और कई बार घंटों तक न्यायालय परिसरों को खाली कराना पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाएं एक-दो बार नहीं बल्कि 20-25 बार तक हो चुकी हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान में स्पेशल साइबर कोर्ट स्थापित करने की घोषणा करते हुए कहा कि अपराधी चाहे जमीन पर अपराध करे या स्क्रीन के पीछे छिपकर, कानून से बच नहीं पाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए मजबूत कानूनी और तकनीकी ढांचा तैयार करेगी।

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