



जयपुर। प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकाय चुनावों की दिशा में अहम कदम उठाते हुए मतदाता सूची तैयार करने का शेड्यूल जारी कर दिया है। आयोग के इस निर्णय के बाद नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। हालांकि जारी कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया में समय लगने के कारण अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं माना जा रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार फिलहाल प्रदेश के 39 जिलों की 196 नगरीय निकायों में ही चुनाव कराए जा सकेंगे। आयोग ने इन्हीं निकायों के लिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को जारी शेड्यूल के मुताबिक संबंधित निकायों में मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट) 24 मार्च को प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद आम नागरिकों से दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी।
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए 28 दिनों की अवधि निर्धारित की है, जिसमें प्राप्त आपत्तियों और दावों का परीक्षण कर उनका निस्तारण किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची 22 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना है।
उधर, नगरीय निकाय चुनावों को लेकर न्यायिक पहलू भी चर्चा में है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को 15 अप्रैल तक निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन आयोग के वर्तमान शेड्यूल के अनुसार अप्रैल माह के भीतर चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे में अब सरकार और निर्वाचन आयोग को न्यायालय के निर्देशों और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाना होगा।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे इन चुनावों को लेकर प्रदेश में सियासी गतिविधियां भी तेज होने लगी हैं। स्थानीय निकाय चुनावों को आगामी राजनीतिक समीकरणों और जमीनी जनमत की कसौटी माना जा रहा है, जिससे सभी दलों की नजर चुनाव कार्यक्रम की अंतिम घोषणा पर टिकी हुई है।