



जयपुर। राजस्थान में सरकारी सेवा में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्ती का बड़ा उदाहरण सामने आया है। नौकरी शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने दो नव नियुक्त फूड सेफ्टी अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इनमें एक महिला अधिकारी भी शामिल है। दोनों अधिकारी अभी प्रोबेशन और ट्रेनिंग अवधि में थे तथा उन्हें करीब 50 दिन पहले ही नियुक्ति पत्र मिला था।
जानकारी के अनुसार बर्खास्त अधिकारियों राजेंद्र बुढानिया और नीलम कुमारी पर आरोप है कि वे अपने ही बैचमेट अभ्यर्थियों को मनचाही फील्ड पोस्टिंग दिलाने के नाम पर डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक की डील कर रहे थे। मामला उस समय सामने आया जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय में नियुक्त 225 फूड सेफ्टी अधिकारियों की ट्रेनिंग चल रही थी।
वर्ष 2019 और 2022 की भर्ती लंबे समय तक न्यायालय में लंबित रहने के कारण चयनित अभ्यर्थियों को लगभग सात वर्षों के इंतजार के बाद 15 दिसंबर को नियुक्ति मिली थी। नियुक्ति के बाद सभी अधिकारियों को प्रोबेशन अवधि के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा था। इसी दौरान विभागीय अधिकारियों को मौखिक शिकायत मिली कि कुछ प्रशिक्षु अधिकारी पोस्टिंग से पहले ही पैसे लेकर प्रभावशाली जगहों पर नियुक्ति कराने का लालच दे रहे हैं।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने एडिशनल कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर, विधि विशेषज्ञ सहित अधिकारियों की 7 सदस्यीय जांच समिति गठित की। जांच के दौरान संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की गई और डिकॉय ऑपरेशन चलाया गया। कॉल रिकॉर्डिंग के जरिए दोनों आरोपियों से संपर्क किया गया, जिसमें उन्होंने पैसों के बदले मनचाही पोस्टिंग दिलाने का भरोसा दिया। रिकॉर्डेड बातचीत को जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद आरोप प्रमाणित माने गए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने 10 फरवरी को सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को ट्रेनिंग अवधि में ही बर्खास्त कर दिया। आदेश में इसे गंभीर कदाचार मानते हुए राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम, 1965 के नियम 30 के तहत सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत तुरंत कार्रवाई की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत थे। नागौर निवासी राजेंद्र बुढानिया पूर्व में सरकारी शिक्षक था, जबकि झुंझुनूं की नीलम कुमारी लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थी। हाल ही में चयन होने के बाद दोनों ने फूड सेफ्टी अधिकारी पद जॉइन किया था, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उनका करियर शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गया।
यह कार्रवाई विभाग के लिए एक स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया के बाद भी यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार सामने आता है तो तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाएगी।