



दौसा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दौसा और आसपास के जिलों में तेजी से फैल रही सिलिकोसिस बीमारी को गंभीर मानवीय संकट बताते हुए सरकारों से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। गुरुवार शाम रामकरण जोशी राजकीय जिला अस्पताल के टीबी एवं चेस्ट विभाग में भर्ती मरीजों से मुलाकात करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सिलिकोसिस के कारण बड़ी संख्या में युवाओं की मौत हो रही है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
गहलोत ने कहा कि सिलिकोसिस एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसमें मरीज की मौत लगभग तय हो जाती है। उन्होंने इसकी तुलना कैंसर से करते हुए कहा कि कैंसर में इलाज के लिए समय मिलता है, लेकिन सिलिकोसिस उससे भी अधिक गंभीर है क्योंकि यह धीरे-धीरे फेफड़ों को पूरी तरह निष्क्रिय कर देती है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों से इस बीमारी को उच्च प्राथमिकता में शामिल करने की अपील की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्थर खदानों और औद्योगिक इकाइयों पर सख्त निगरानी की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जहां सिलिकोसिस के मामले सामने आ रहे हैं, वहां कारखानों और खदानों की नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए। ठेकेदारों और संचालकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।
सिलिकोसिस प्रमाणपत्र बनाने में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी गहलोत ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टरों या कर्मचारियों ने गलत तरीके से प्रमाणपत्र जारी किए हैं या पैसे लिए हैं, तो केवल तबादले या एपीओ करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों को निलंबित कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गलत काम करने वालों को बचाना नहीं चाहिए।
गहलोत ने यह भी कहा कि सिलिकोसिस की स्थिति का आकलन करने के लिए दौसा आने वाली केंद्र सरकार की टीम केवल औपचारिकता न निभाए, बल्कि जमीनी स्तर पर गंभीर जांच करे। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा ताकि पीड़ित परिवारों को राहत, उपचार और मुआवजा सुनिश्चित हो सके। इस दौरान सांसद मुरारी लाल मीणा भी उनके साथ मौजूद रहे। दौरे के दौरान गहलोत ने दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा के पारिवारिक समारोह में भी भाग लिया।