



जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायतीराज चुनाव इस बार एक महत्वपूर्ण बदलाव के साथ आयोजित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार पंच और सरपंच दोनों पदों के चुनाव अब ईवीएम की बजाय मतपत्र (बैलेट पेपर) से कराए जाएंगे। इस निर्णय को चुनावी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसका सीधा असर मतदान की गति, मतगणना प्रक्रिया और परिणाम घोषित होने के समय पर पड़ेगा।
बैलेट पेपर प्रणाली की वापसी केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इससे चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाएंगी। मतदान कर्मियों को मतपत्र वितरण, सीलिंग, सुरक्षा और मतपेटियों के सुरक्षित परिवहन जैसी अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी होंगी। वहीं प्रत्याशियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी मतदान केंद्रों पर अधिक सतर्क रहना होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतपत्र का स्वरूप भी निर्धारित कर दिया गया है—
पंच पद का मतपत्र: गुलाबी रंग के कागज पर छापा जाएगा।
सरपंच पद का मतपत्र: सफेद रंग के कागज पर होगा।
मतपत्र की चौड़ाई 4 इंच तय की गई है।
ऊपरी भाग में काली सीमारेखा रहेगी।
बाईं ओर क्रमांक तथा दाईं ओर पंचायत वार्ड से संबंधित निर्वाचन विवरण अंकित होगा।
सभी जानकारी हिंदी भाषा में प्रकाशित की जाएगी।
प्रत्येक अभ्यर्थी का नाम, चुनाव चिन्ह और निर्धारित क्रमांक स्पष्ट रूप से अंकित रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार बैलेट पेपर से मतदान होने पर मतगणना प्रक्रिया लंबी हो सकती है। ईवीएम की तुलना में मतपत्रों की गिनती में अधिक समय लगेगा, जिससे परिणाम घोषित होने में देरी संभव है। हालांकि आयोग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक मतदान प्रणाली मतदाताओं के लिए अधिक सहज साबित हो सकती है।
चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन को मतपत्रों की छपाई, सुरक्षित भंडारण, मतदान सामग्री की आपूर्ति और प्रशिक्षण कार्यक्रम समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी भी रखी जाएगी।