



जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन की कार्यवाही के सुचारु संचालन और संसदीय मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चर्चा में भाग लेने के लिए जिन सदस्यों के नाम निर्धारित किए जाते हैं, वे मंत्री के उत्तर तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि चर्चा केवल विचार व्यक्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मंत्री के उत्तर को सुनना भी प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है। सीमित कार्य दिवसों के दौरान जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों को सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कोरम की स्थिति उत्पन्न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विशेष रूप से जिन सदस्यों का नाम चर्चा के लिए निर्धारित है, उनकी उपस्थिति अनिवार्य है।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान संबंधित मंत्री के उत्तर के समय मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अध्यक्ष ने कहा कि 16 अनुदान मांगों पर अलग-अलग मंत्री उत्तर देते हैं, ऐसे में मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों का भी सदन में उपस्थित रहना संसदीय परंपरा के अनुरूप है।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि ने कटौती प्रस्तावों की प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए कहा कि जिस दिन संबंधित अनुदान मांग सदन में ली जाती है, उस दिन प्रस्तुत सभी कटौती प्रस्ताव मान्य माने जाएंगे।
बोलने की अनुमति उन्हीं सदस्यों को दी जाएगी, जिनके नाम दलों के सचेतकों और सरकारी मुख्य सचेतक द्वारा भेजे जाएंगे।
प्राथमिकता सूचीबद्ध कटौती प्रस्ताव रखने वाले सदस्यों को दी जाएगी।
मतदान के समय कटौती प्रस्ताव स्वतः वापस माने जाएंगे।
जिस सदस्य का नाम पुकारा जाएगा, वे अपने सभी प्रस्तावों पर एक साथ विचार रखेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने यह भी स्पष्ट किया कि मांगों पर बहस के दौरान उठाए गए प्रश्नों का उत्तर संबंधित मंत्री उसी दिन देंगे और उसके बाद मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी। यदि समयाभाव के कारण कुछ प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया जा सके, तो उनका लिखित उत्तर संबंधित सदस्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सभी विधायकों से संसदीय परंपराओं का पालन करने, सत्र के दौरान पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित करने और अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विधायक जनता द्वारा चुने जाते हैं, इसलिए सदन में उनकी जिम्मेदारी और भी अधिक है।