Wednesday, 18 February 2026

राजस्व मण्डल की समीक्षा: “न्याय के मंदिर” की गरिमा बनाए रखना बार-बैंच की साझी जिम्मेदारी : वी. श्रीनिवास


राजस्व मण्डल की समीक्षा: “न्याय के मंदिर” की गरिमा बनाए रखना बार-बैंच की साझी जिम्मेदारी :  वी. श्रीनिवास

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अजमेर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बुधवार को अजमेर प्रवास के दौरान राजस्व मण्डल, राजस्थान के कार्यों की समीक्षा की। मण्डल के अध्यक्ष हेमन्त गेरा ने लंबित प्रकरणों, सुनवाई की गति और काश्तकार हित में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। बैठक में मण्डल के सदस्य, रजिस्ट्रार महावीर प्रसाद, संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़, जिला कलेक्टर लोक बंधु तथा राजस्व मण्डल अभिभाषक संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

“न्याय के मंदिर” की गरिमा अक्षुण्ण रहे

मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्व मण्डल की पहचान राज्य ही नहीं, पूरे देश में “न्याय के मंदिर” के रूप में है। इसकी गरिमा बनाए रखना बार और बैंच की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने काश्तकार हित को सर्वोपरि रखते हुए निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी निर्णय देने पर जोर दिया। रोजाना हजारों काश्तकारों की उपस्थिति इस संस्था में विश्वास को दर्शाती है।

लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण पर जोर

राज्यभर के राजस्व न्यायालयों और मण्डल में लंबित मामलों की संख्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने निस्तारण की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।

  • नोटिस तामील की प्रक्रिया तेज करने

  • सदस्यों की नियमित बैठक सुनिश्चित करने

  • समयबद्ध सुनवाई और आदेश पारित करने
    पर विशेष बल दिया गया।

सार्वजनिक भूमि, मंदिर, नदी-नालों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और निर्णय लेखन की गुणवत्ता सुधारने हेतु समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित करने की आवश्यकता भी बताई गई।

तकनीक का बढ़ेगा उपयोग, नया भवन समय पर शुरू हो

मुख्य सचिव ने न्याय प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए तकनीक के व्यापक उपयोग की बात कही। वर्तमान बजट में राजस्व मण्डल के नए भवन हेतु आवंटित 150 करोड़ रुपये से निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ करने के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व नियमों पर विशेषज्ञों के साथ विमर्श कर प्रक्रियाओं को और स्पष्ट व प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

बार-बैंच समन्वय से मिलेगा समय पर न्याय

मुख्य सचिव ने कहा कि न्याय दिलाने के लिए बार की तत्परता के साथ-साथ बैंच की सक्रियता भी आवश्यक है। आपसी समन्वय से कार्य करने पर काश्तकारों को समय पर राहत मिल सकेगी और संस्था की साख और मजबूत होगी।

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