



जयपुर। 900 करोड़ रुपये के कथित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला मामले में गिरफ्तार 9 अधिकारियों को बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने विशिष्ट न्यायालय भ्रष्टाचार अधिनियम क्रम संख्या-1 में पेश किया। एसीबी की टीम सभी आरोपियों को एक ही वाहन में कोर्ट लेकर पहुंची। अधिकारियों के हाथों में लाल कपड़े में लिपटी फाइलें थीं, जिनमें घोटाले से संबंधित दस्तावेज बताए जा रहे हैं। एसीबी ने अदालत से 5 दिन का रिमांड मांगा लेकिन कोर्ट ने एसीबी को तीन दिन का रिमांड दिया।
15 स्थानों पर छापेमारी के बाद कार्रवाई
एसीबी ने 17 फरवरी को जयपुर, उदयपुर, जालोर, बाड़मेर और सीकर सहित प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। इसके अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली समेत कुल 15 जगहों पर कार्रवाई की गई। छापों के बाद 9 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया।
चीफ इंजीनियर (जयपुर शहर) केडी गुप्ता
तत्कालीन मुख्य अभियंता, पीएचईडी परियोजना जयपुर – दिनेश गोयल
रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर – डीके गौड़
तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सिविल पीएचईडी जयपुर – निरिल कुमार (वर्तमान में चीफ इंजीनियर, चूरू)
तत्कालीन वित्तीय सलाहकार, जेजेएम – सुशील शर्मा
अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर (तत्कालीन सचिव RWSSM) – शुभांशु दीक्षित
रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता, पीएचईडी – अरुण श्रीवास्तव
रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता, पीएचईडी पीआईयू-द्वितीय डीडवाना – महेंद्र प्रकाश सोनी (एमपी सोनी)
तत्कालीन अधिशाषी अभियंता, पीएचईडी शाहपुरा (वर्तमान में निलंबित) – विशाल सक्सेना
सूत्रों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों में फर्जी बिल, वित्तीय गड़बड़ी और कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर यह कार्रवाई की गई है। एसीबी ठेकेदारों, विभागीय अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद तय होगी। फिलहाल एसीबी की जांच प्रक्रिया जारी है और दस्तावेजों की छानबीन की जा रही है।