



जयपुर एक बार फिर राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं के विराट उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती के तत्वावधान में राजस्थान सरकार के पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग तथा जवाहर कला केंद्र के सहयोग से 20 से 22 फरवरी तक तीन दिवसीय ‘लोक कला संगम-2026’ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन 20 फरवरी को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा करेंगे।
कार्यक्रम शिल्पग्राम, जवाहर कला केंद्र में आयोजित होगा। इसके पोस्टर का विमोचन राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने किया। संस्कार भारती जयपुर प्रांत के मंत्री प्रदीप सिंह राजावत के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य “राजस्थान रै लोकरंग रो उजास” को वैश्विक पहचान दिलाना है। तीन दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय समागम में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 400 से अधिक लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
20 फरवरी को उद्घाटन सत्र में बम रसिया, भपंग वादन, लांगुरिया, मयूर नृत्य, चरकुला, चकरी नृत्य, जिकड़ी और हेला ख्याल दंगल जैसी लोक विधाओं की प्रस्तुति होगी। पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्यों की धुनों के बीच राजस्थान की विविध सांस्कृतिक छटा मंच पर जीवंत होगी।
21 फरवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह डॉ. दत्तात्रेय होसबोले मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दिन कठपुतली नाट्य, तमाशा व्रतराज, कुचामणी ख्याल, जयपुर की गाली गायन परंपरा, ढूंढाड़ी गीत ‘चिरमी’, अलगोजा-मंजीरा वादन, कच्छीघोड़ी, टोंक की चार बैंत और स्वांग बहरूपिया जैसी प्रस्तुतियां दर्शकों को लोक संस्कृति के विविध रंगों से रूबरू कराएंगी।
22 फरवरी को उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लेंगी। अंतिम दिन शेखावाटी का चंग धमाल, गींदड़, फड़वाचन, रागिनी, भवाई, तेरहताली और अन्य लोक गायन शैलियां मंच पर प्रस्तुत की जाएंगी। कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक आयोजित होगा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ शिल्पग्राम में पारंपरिक हस्तशिल्प की विशेष प्रदर्शनी भी लगेगी, जहां आगंतुकों को राजस्थान की लोक कला और शिल्प को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। संस्कार भारती की प्रांत अध्यक्ष मधु भट्ट तैलंग ने बताया कि दोपहर में ‘कृष्णायन’ सभागार में ‘लोक चौपाल’ का आयोजन होगा, जिसमें छह सत्रों में लगभग 25 वक्ता लोक साहित्य, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक शिष्टाचार जैसे विषयों पर विचार साझा करेंगे।
प्रांत महामंत्री बनवारी लाल चेजारा ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विलुप्त होती लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास है। लोक कला संगम-2026 जयपुर को सांस्कृतिक उत्सव की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिए हुए है।