Wednesday, 18 February 2026

हाईकोर्ट का आदेश: जेडीए सामुदायिक केंद्र करे खाली, 18-19 जोन कार्यालय को सरकारी या किराए के भवन में शिफ्ट करने के निर्देश, अगली सुनवाई 16 मार्च को


हाईकोर्ट का आदेश: जेडीए सामुदायिक केंद्र करे खाली, 18-19 जोन कार्यालय को सरकारी या किराए के भवन में शिफ्ट करने के निर्देश, अगली सुनवाई 16 मार्च को

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जयपुर में मानसरोवर पत्रकर कॉलोनी स्थित सामुदायिक केंद्र में संचालित हो रहे जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के 18-19 जोनकार्यालय को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि सामुदायिक केंद्र का उपयोग सार्वजनिक हित के लिए होना चाहिए, न कि किसी सरकारी कार्यालय के लिए।

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा की डी.बी. सिविल रिट पिटिशन संख्या 11590/2024 में सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की खंडपीठ ने 12 फरवरी को यह आदेश पारित किया।

हाई कोर्ट की खंडपीठ में मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता अनीश बराला,तपिश सारस्वत और निधि बिस्सा ने खंडपीठ के समक्ष दलीलें रखते हुए सामुदायिक भवन को तत्काल खाली कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि संबंधित भवन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप नहीं हो रहा है और इसे नियमों के अनुसार खाली कराया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट के समक्ष दायर हलफनामे में बताया गया कि जेडीए का डिप्टी कमिश्नर (पीआरएन साउथ) कार्यालय पहले मानसरोवर सेक्टर-12 स्थित हाउसिंग बोर्ड की बिल्डिंग में संचालित हो रहा था। 15 जून 2024 को उस भवन को सैटेलाइट अस्पताल एवं अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (यूसीएचसी) के विकास हेतु खाली कराने का निर्देश दिया गया। इसके बाद जेडीए के 18-19 जोनकार्यालय को अस्थायी रूप से मानसरोवर स्थित पत्रकर कॉलोनी के सामुदायिक केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया।

जेडीए की ओर से यह भी बताया गया कि वेस्ट-वे-हाइट्स योजना में स्थायी कार्यालय निर्माण का निर्णय लिया गया है, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण में न्यूनतम दो वर्ष का समय लगेगा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाई कोर्ट खंडपीठ ने प्रथमदृष्टया (Prima Facie) कहा कि किसी भी कॉलोनी में स्थापित सामुदायिक केंद्र का उद्देश्य आम जनता की सुविधा है और वहां किसी कार्यालय की स्थापना की अनुमति नहीं दी जा सकती हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा या कोई नागरिक किसी अवैध कार्रवाई की ओर ध्यान दिलाता है, तो उसे “लोकस स्टैंडी” के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। प्रत्येक नागरिक को राज्य की किसी भी प्राधिकरण द्वारा की जा रही संभावित अवैधता के खिलाफ अदालत को सूचित करने का अधिकार है। हाई कोर्ट ने जनहित याचिका को सही बताते हुए खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि जनहित याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा को इस विषय पर हाई कोर्ट का ध्यान आकर्षित करने का पूर्ण अधिकार है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जेडीए के अधिवक्ता की आपत्ति को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह आपत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है।। 

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जेडीए को सलाह दी कि वह अपना कार्यालय किसी अन्य सरकारी भवन या किराए के परिसर में शिफ्ट करे और सामुदायिक केंद्र को जनता के उपयोग के लिए खाली करे।

अगली सुनवाई 16 मार्च को

हाई कोर्ट ने जेडीए के अधिवक्ता को निर्देश दिए कि अगली तारीख तक यह स्पष्ट किया जाए कि कार्यालय को कब और कहां शिफ्ट किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

यह आदेश शहरी सार्वजनिक संपत्तियों के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि सामुदायिक संसाधनों का उपयोग जनहित में ही होना चाहिए।

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