Saturday, 29 August 2026

93 बजरी लीज निरस्तीकरण पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, दाम 30 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद


93 बजरी लीज निरस्तीकरण पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, दाम 30 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

राजस्थान में बजरी संकट और बढ़ती कीमतों के बीच राज्य सरकार को बड़ी राहत की उम्मीद नजर आ रही है। प्रदेश के चार जिलों में 93 बजरी लीज निरस्त किए जाने के मामले में राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेगी। खान विभाग इसकी तैयारियों में जुट गया है और कानूनी रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सरकारी आकलन के अनुसार यदि ये 93 बजरी लीज बहाल हो जाती हैं और इनमें उत्पादन शुरू होता है, तो प्रदेश में बजरी के दामों में लगभग 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही खान विभाग को इन लीजों से सालाना करीब 200 करोड़ रुपए तक का राजस्व और रॉयल्टी मिलने का अनुमान है, जो राज्य के खजाने के लिए अहम साबित हो सकता है।

गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट ने भीलवाड़ा, बाड़मेर, टोंक और सिरोही जिलों में बजरी ब्लॉकों की नीलामी को निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने न केवल लीज रद्द की, बल्कि लीजधारकों को जमा कराई गई राशि लौटाने के भी निर्देश दिए थे। इस फैसले के बाद प्रदेश में बजरी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता और बढ़ गई थी।

लीज निरस्त होने का मुख्य कारण नदियों में बजरी की प्राकृतिक भरपाई (नेचुरल रीप्लेनिशमेंट) से जुड़े नियमों का उल्लंघन बताया गया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के निर्देशों का पालन किए बिना नीलामी कर दी। नियमों के अनुसार, किसी क्षेत्र में बजरी की लीज समाप्त होने के बाद वहां कम से कम पांच वर्ष तक खनन पर रोक रहनी चाहिए, ताकि नदियों में बजरी की प्राकृतिक भरपाई हो सके, लेकिन सरकार ने इस शर्त का पालन नहीं किया।

खान विभाग के सामने इस मामले में तीन विकल्प थे—हाई कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर करना, फैसले की पालना करना या सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल करना। विभाग और सरकार ने तीसरे विकल्प को चुनते हुए SLP दायर करने पर सहमति बनाई है। माना जा रहा है कि सरकार 2020 की सैंड पॉलिसी को अपने पक्ष में आधार बनाएगी, जिस पर पहले भी सुप्रीम कोर्ट या उससे जुड़ी समितियों की राय सामने आ चुकी है।

इस मामले पर टिप्पणी करते हुए खान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत ने कहा कि विभाग नियमों के दायरे में रहकर ही आगे की कार्रवाई करेगा और उचित कानूनी विकल्पों पर काम किया जा रहा है। वहीं, विषय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ठोस तर्क और विशेषज्ञ राय के साथ सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखती है, तो सुनवाई और राहत की संभावना बन सकती है।

Previous
Next

Related Posts