



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 को पूरी तरह दिशाहीन और जनविरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट न केवल आम आदमी की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला है, बल्कि बाजार की स्थिरता के लिए भी घातक सिद्ध हुआ है। जूली के अनुसार बजट में न तो आमजन को राहत दी गई है और न ही अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का कोई स्पष्ट रोडमैप नजर आता है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि बजट पेश होते ही शेयर बाजार में आई भारी गिरावट इस बात का बड़ा संकेत है कि यह बजट निवेशकों और बाजार की वास्तविक जरूरतों को समझने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक दिशा के लिए चिंताजनक बताया और कहा कि सरकार को इस संकेत को गंभीरता से लेना चाहिए था।
उन्होंने रुपये की गिरती स्थिति और बढ़ती महंगाई पर भी सवाल खड़े किए। जूली ने कहा कि डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहे रुपये को संभालने या उसे मजबूत करने के लिए बजट में कोई ठोस रणनीति नजर नहीं आती। वहीं, आमजन को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली महंगाई पर भी वित्त मंत्री की चुप्पी गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहद निराशाजनक है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी बेरोजगारी की चुनौती पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से AI की ओर बढ़ रही है, जिससे आने वाले समय में रोजगार पर बड़ा असर पड़ेगा, लेकिन केंद्र सरकार के पास इस तकनीकी बदलाव से निपटने और युवाओं के रोजगार को सुरक्षित रखने का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है।
राजस्थान के संदर्भ में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बजट को पूरी तरह ‘शून्य’ करार देते हुए कहा कि राज्य के साथ एक बार फिर सौतेला व्यवहार किया गया है। उन्होंने बताया कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की पुरानी मांग को फिर नजरअंदाज कर दिया गया। जल जीवन मिशन के तहत राजस्थान के विशाल रेगिस्तानी क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए किसी विशेष ग्रांट का भी कोई प्रावधान नहीं किया गया। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा पहले जिन 9 एक्सप्रेस-वे के निर्माण का दावा किया गया था, बजट भाषण में उनका जिक्र तक नहीं होना प्रदेश की जनता के साथ धोखा है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अंत में कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी है। इसमें न किसानों के लिए ठोस राहत है, न युवाओं के लिए रोजगार का भरोसा और न ही राजस्थान के समग्र विकास के लिए कोई स्पष्ट विजन। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की ‘डबल इंजन’ सरकार राजस्थान की जनता को विकास नहीं, बल्कि लगातार निराशा ही दे रही है।