Saturday, 29 August 2026

स्कूलों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव–निदेशक को लगाई फटकार


स्कूलों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव–निदेशक को लगाई फटकार

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राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत के आदेश की पालना में प्रमुख शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल और शिक्षा निदेशक सीताराम जाट अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। स्वप्रेरित प्रसंज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि विभाग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ—जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन—ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आपने जो रिपोर्ट पेश की है, वह कागजों में कुछ और है, जबकि धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग है।” अदालत ने कहा कि अब समय बदल गया है और सच्चाई छुपाई नहीं जा सकती—“अब पेड़ भी गवाह देने यहां आते हैं।”

कोर्ट ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि “हम बच्चों और समाज को जवाब नहीं दे पा रहे हैं।” अदालत ने खास तौर पर बालिकाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई स्कूलों में शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चियां दिन भर पानी तक नहीं पीतीं, ताकि उन्हें टॉयलेट न जाना पड़े। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि “राजनेता केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग पर ध्यान देते हैं, लेकिन बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है।”

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से ASG भरत व्यास और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर ठोस कदम उठाने का प्रयास करेंगे।

हाईकोर्ट ने प्रमुख शिक्षा सचिव को निर्देश देते हुए कहा कि वे मुख्य सचिव और वित्त सचिव से समन्वय कर आगामी बजट में स्कूलों के आधारभूत ढांचे—भवन, शौचालय, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं—के लिए पर्याप्त फंड का प्रावधान सुनिश्चित करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा यह मामला सर्वोच्च प्राथमिकता का है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख 16 फरवरी तय की है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि अगली सुनवाई तक ठोस प्रगति नजर नहीं आई, तो और कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं।

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