



जयपुर। एसोसिएशन ऑफ स्माल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया (असमनी) के तत्वावधान में शनिवार को जयपुर के कलानेरी परिसर में सामाजिक सरोकार एवं अपराध विषयक पत्रकारिता पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह असमनी, राजस्थान का वर्ष 2026 का पहला एकेडमिक कार्यक्रम रहा, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पत्रकारों ने सहभागिता की।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क आयुक्त राकेश शर्मा रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और कलम का प्रयोग विवेकपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से व्यक्तिगत लांछनों से बचने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रयोग को अत्यंत सावधानी से अपनाने का आह्वान किया। राकेश शर्मा ने कार्यशाला को मीडियाकर्मियों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा ने कहा कि सामाजिक सरोकार और अपराध एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए विषय हैं। वर्तमान समय में इस क्षेत्र में पत्रकारिता करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, इसलिए इस विषय पर लेखन और रिपोर्टिंग में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

अपराधों की रोकथाम में आमजन को जागरूक करने में समाचार पत्रों की अहम भूमिका: गोपाल शर्मा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पत्रकार एवं विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि समाचारों में सामाजिक सरोकारों से जुड़े पहलुओं को प्रमुखता से उजागर किया जाना चाहिए। उन्होंने अपराधों की रोकथाम में आमजन को जागरूक करने में समाचार पत्रों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि किस प्रकार एक फरार अपराधी नाम बदलकर पत्रकार बनकर समाज में सक्रिय था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया। गोपाल शर्मा ने पत्रकारों की समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाकर समाधान कराने का आश्वासन भी दिया।
मुख्यमंत्री के विशेष अधिकारी गोविंद पारीक अस्वस्थता के कारण उपस्थित नहीं हो सके। उनका संदेश गोपाल गुप्ता द्वारा पढ़कर सुनाया गया।
एसोसिएशन ऑफ स्माल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया राजस्थान के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन में पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने सम्मान निधि में वृद्धि, राजस्थान रोडवेज में अंतिम गंतव्य तक निःशुल्क यात्रा, सम्मान निधि के नियमों का सरलीकरण, सर्किट हाउस में रियायती दर पर ठहराव, लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को नियमित सजावटी विज्ञापन तथा महाराष्ट्र की तर्ज पर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने जैसी मांगों को सरकार के समक्ष उठाने की जानकारी दी।
कार्यशाला में पत्रकार हरीश पाराशर ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े समाचारों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। ऐश्वर्या प्रधान ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शब्दों का विशेष महत्व होता है और कई बार छोटे समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें टीवी चैनलों को बहस के लिए मजबूर कर देती हैं। मदन कलाल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, उनके वक्तव्य का वाचन अमृता मौर्य ने किया।
कार्यशाला के दौरान आमंत्रित वक्ताओं ने सामाजिक सरोकार एवं अपराध आधारित पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए फील्ड रिपोर्टिंग के तकनीकी और कानूनी पक्षों की विस्तृत जानकारी दी। उपस्थित पत्रकारों ने आयुक्त एवं वक्ताओं से सवाल-जवाब भी किए।
कार्यक्रम में डीग जिले के बहज के टीलों से खुदाई में मिले ब्राह्मी लिपि, महाभारत एवं गुप्तकालीन पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया। पुरातत्व विभाग द्वारा निर्मित इस वृत्तचित्र का यह पहला सार्वजनिक प्रदर्शन था। सभी प्रतिभागी पत्रकारों को नववर्ष का कैलेंडर एवं अन्य सामग्री भी वितरित की गई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र बोडा, अशोक चतुर्वेदी, राजेंद्रराज और ललित शर्मा सहित अनेक मीडियाकर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक एस.जी. शर्मा ने बताया कि उन्होंने कई कानूनी पहलुओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सुझाव भेजे हैं, जिन पर अमल होने से न्यायालयों में लंबित मामलों में कमी आ सकती है। अंत में उन्होंने सभी अतिथियों और पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।