



राजस्थान सरकार ने नई आबकारी एवं शराब नीति जारी कर दी है, जिसके तहत आम उपभोक्ताओं और ठेका संचालकों—दोनों पर सीधा असर पड़ेगा। नई नीति के अनुसार आबकारी ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है, जिससे 1 अप्रैल 2026 से प्रदेशभर में देसी शराब, अंग्रेजी शराब और बीयर की कीमतों में 5 रुपए से लेकर 20 रुपए तक की बढ़ोतरी होगी। वहीं, ठेकेदारों को अब पहले की तुलना में अधिक शराब बेचनी होगी, क्योंकि लाइसेंस रिन्युअल से जुड़ी गारंटी फीस भी बढ़ा दी गई है।
फाइनेंस डिपार्टमेंट (आबकारी) के निर्देशों के अनुसार वर्तमान में संचालित शराब ठेकों के लिए लाइसेंस नवीनीकरण की गारंटी राशि बढ़ाई गई है। इसका सीधा असर यह होगा कि ठेका संचालकों को मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में अधिक बिक्री करनी पड़ेगी, ताकि बढ़ी हुई लागत की भरपाई हो सके। ठेकेदारों का कहना है कि इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
नई आबकारी नीति में शराब की दुकानों पर बिक्री के समय को लेकर भी अहम बदलाव का रास्ता खोला गया है। सरकार ने आबकारी आयुक्त को शराब बिक्री के समय की समीक्षा करने के अधिकार दिए हैं। संभावना जताई जा रही है कि समीक्षा के बाद प्रदेश में शराब बिक्री की मौजूदा समयावधि (सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक) को दो घंटे तक बढ़ाया जा सकता है।
दो गोदाम आवंटन का प्रावधान
नई नीति में एक और बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब शराब दुकान संचालकों को एक के बजाय दो गोदाम आवंटित किए जाएंगे। ये गोदाम केवल स्टॉक रखने के लिए होंगे, लेकिन शहरी सीमा से बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित गोदामों से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें पहले से ही सामने आती रही हैं। मौजूदा ठेकेदारों का आरोप है कि इस प्रावधान से अवैध शराब कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
20 रुपए तक महंगी होगी शराब
सरकार ने इस बार आबकारी ड्यूटी को 75 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी कर दिया है। ड्यूटी में 5 फीसदी की इस बढ़ोतरी का असर सीधे कीमतों पर पड़ेगा। 1 अप्रैल 2026 से बीयर की बोतल या कैन लगभग 5 रुपए तक महंगी होगी, जबकि 750 एमएल की अंग्रेजी शराब की बोतल की कीमत 20 रुपए तक बढ़ सकती है।
आवेदन शुल्क में भी बढ़ोतरी
शराब ठेकों की नीलामी से जुड़े आवेदन शुल्क में भी इजाफा किया गया है। पहले 2 करोड़ रुपए तक की न्यूनतम रिजर्व प्राइस वाली दुकानों के लिए आवेदन शुल्क 50 हजार रुपए था, जिसे बढ़ाकर 60 हजार रुपए कर दिया गया है। वहीं, 2 करोड़ रुपए से अधिक रिजर्व प्राइस वाली दुकानों के लिए आवेदन शुल्क 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपए कर दिया गया है।
कुल मिलाकर नई आबकारी नीति से सरकार को राजस्व बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन बढ़ी कीमतों और सख्त शर्तों के चलते उपभोक्ताओं और ठेका संचालकों—दोनों की मुश्किलें बढ़ना तय मानी जा रही हैं।