Saturday, 29 August 2026

बड़ा खुलासा: जेई भर्ती-2020 की रद्द परीक्षा का दोबारा हुआ पेपर भी लीक, रैंक-12 पाने वाला सहायक अभियंता गिरफ्तार


बड़ा खुलासा: जेई भर्ती-2020 की रद्द परीक्षा का दोबारा हुआ पेपर भी लीक, रैंक-12 पाने वाला सहायक अभियंता गिरफ्तार

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जयपुर। कनिष्ठ अभियंता (जेई) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 के पेपर लीक मामले में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक और सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि पेपर लीक के कारण रद्द की गई जेई भर्ती-2020 की परीक्षा का सितंबर 2021 में दोबारा आयोजन हुआ था, लेकिन उस परीक्षा का प्रश्नपत्र भी परीक्षा से पहले लीक कर दिया गया था। इस मामले में एसओजी ने जालौर से जुड़े एक बड़े पेपर माफिया नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए वर्तमान में सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यरत सहायक अभियंता गणपत लाल बिश्नोई को गिरफ्तार किया है, जिसने लीक पेपर के आधार पर मेरिट में 12वां स्थान हासिल किया था।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल के अनुसार दिसंबर 2020 में आयोजित जेई भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले की जांच के दौरान पुलिस को संदेह हुआ कि रद्द परीक्षा के बाद भी कुछ अभ्यर्थी दोबारा असामान्य रूप से सफल हुए। जब आरोपियों से इस संबंध में पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि 12 सितंबर 2021 को दोबारा आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र भी पहले ही आउट कर दिया गया था। इस खुलासे के बाद एसओजी ने 19 जनवरी 2026 को नया मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।

जांच के दौरान कुख्यात पेपर माफिया जगदीश विश्नोई और उसके सहयोगियों की भूमिका सामने आई, जिन्होंने परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। इसी नेटवर्क के जरिए गणपत लाल बिश्नोई ने अवैध रूप से प्रश्नपत्र हासिल कर परीक्षा दी और मेरिट सूची में 12वां स्थान प्राप्त किया। आरोपी वर्तमान में बाड़मेर जिले में पीडब्ल्यूडी में सहायक अभियंता के पद पर तैनात था और पदोन्नति भी पा चुका था। एसओजी ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और अब उसकी नियुक्ति तथा पदोन्नति को निरस्त कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

एसओजी की जांच में यह भी सामने आया है कि यही संगठित गिरोह सितंबर 2021 में हुई सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक में भी शामिल था। यानी कुछ ही दिनों के अंतराल में इस गिरोह ने प्रदेश की दो बड़ी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। एसओजी का कहना है कि पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच जारी है और अनुचित लाभ लेकर सिस्टम में घुसे ऐसे फर्जी अधिकारियों को बाहर किया जाएगा।

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