



सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा अधिसूचित नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नए नियमों के कई प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके गलत इस्तेमाल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि मौजूदा स्वरूप में ये नियम भ्रम और असमानता की स्थिति पैदा कर सकते हैं।
यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, अधिवक्ता विनीत जिंदल और राहुल दीवान की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाओं में कहा गया है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और समान अवसर के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं। उल्लेखनीय है कि यूजीसी ने 13 जनवरी को इन नए नियमों को अधिसूचित किया था, जिसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में इसका विरोध शुरू हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए इन नियमों पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने यूजीसी को नियमों का नया मसौदा तैयार करने को कहा है, ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता या भेदभाव की गुंजाइश न रहे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक देशभर में वर्ष 2012 के यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे।
अदालत ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बनाए जाने वाले नियम पारदर्शी, न्यायसंगत और सभी वर्गों के लिए समान होने चाहिए। इस प्रकरण में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी