



राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान बुधवार को जनहित से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिली।
बालमुकुंदाचार्य बोले-मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से बच्चों की पढ़ाई बाधित
भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने जयपुर शहर में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों की तेज आवाज का मामला उठाते हुए कहा कि इससे बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की सेहत और आम लोगों की नींद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने नियम 295 के तहत मुद्दा उठाते हुए कहा कि सुबह चार बजे से ही तेज आवाज शुरू हो जाती है, जिससे ध्वनि प्रदूषण फैलता है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है। बालमुकुंदाचार्य ने आरोप लगाया कि जब स्थानीय लोगों ने लाउडस्पीकर की आवाज कम करने का आग्रह किया तो विवाद की स्थिति बन गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि मस्जिदों सहित सभी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों की आवाज को नियंत्रित करने के लिए सख्त साउंड लिमिट लागू की जाए।
रविंद्र भाटी बोले- पश्चिमी राजस्थान में 50 लाख खेजड़ी काटने की तैयारी
शून्यकाल में निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का मुद्दा उठाया और इसे पर्यावरण व सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया। भाटी ने कहा कि मां अमृता देवी और उनके साथियों ने जिन खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था, आज उन्हीं खेजड़ियों की बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 26 लाख खेजड़ी के पेड़ काटे जा चुके हैं और आने वाले समय में 50 लाख और पेड़ काटने की तैयारी है। इससे पश्चिमी राजस्थान में पर्यावरण असंतुलन के साथ-साथ पलायन भी बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से खेजड़ी संरक्षण के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की।
बांदीकुई को जिला बनाने की उठी मांग
इसी दौरान प्रदेश में नए जिलों की मांग भी एक बार फिर विधानसभा में गूंज उठी। बांदीकुई से भाजपा विधायक भागचंद टाकड़ा ने शून्यकाल में बांदीकुई को जिला बनाए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि बांदीकुई का ऐतिहासिक महत्व रहा है, जहां ब्रिटिश काल में आगरा से पहली रेल चली थी और यहां एक ऐतिहासिक चर्च भी मौजूद है। टाकड़ा ने कहा कि कांग्रेस शासन में बांदीकुई को जिला नहीं बनाया गया, लेकिन अब स्थानीय जनता की भावनाओं को देखते हुए सरकार को इस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कुल मिलाकर शून्यकाल के दौरान उठे इन मुद्दों ने ध्वनि प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पुनर्गठन जैसे अहम विषयों को एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया।