



गणतंत्र दिवस-2026 के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित राष्ट्रीय परेड में राजस्थान अपनी समृद्ध संस्कृति, अद्वितीय शिल्पकला और गौरवशाली विरासत की भव्य झांकी के माध्यम से पूरे देश का ध्यान आकर्षित करेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार की गई यह झांकी ‘राजस्थान—मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श’ थीम पर आधारित है, जिसमें प्रदेश की कला, परंपरा और लोकसंस्कृति का जीवंत चित्रण किया है।
इस झांकी का मुख्य आकर्षण बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला होगी, जो सोने की बारीक नक्काशी, पारंपरिक शिल्प और उत्कृष्ट कारीगरी के लिए जानी जाती है। उस्ता कला से सजी सुराही और कुप्पी राजस्थान की हस्तकला परंपरा की समृद्धि और शिल्पकारों की सृजनशीलता को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करेंगी।
झांकी में राजस्थान के प्राचीन लोकवाद्य रावणहत्था का वादन करती 180 डिग्री घूमती प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। यह नवाचार राजस्थान के लोकसंगीत की गहराई, उसकी ऐतिहासिक जड़ें और सांस्कृतिक जीवंतता को आधुनिक प्रस्तुति के साथ दर्शाएगा।
इसके साथ ही झांकी में मरुधरा की पहचान माने जाने वाले ऊंट की प्रतिमा, पारंपरिक कलाकृतियां, लोक संगीत और लोकनृत्य को भी शामिल किया गया है। यह समग्र प्रस्तुति राजस्थान की विविध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक वैभव और ऐतिहासिक गौरव को देश-दुनिया के सामने सशक्त रूप से प्रदर्शित करेगी।
गणतंत्र दिवस की राष्ट्रीय परेड में राजस्थान की यह झांकी न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देगी, बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता में राजस्थान के विशिष्ट योगदान को भी रेखांकित करेगी।