Saturday, 29 August 2026

एकल पट्टा प्रकरण में फिर खुली जांच की राह, एसीबी को अग्रिम जांच की ट्रायल कोर्ट से मिली अनुमति


एकल पट्टा प्रकरण में फिर खुली जांच की राह, एसीबी को अग्रिम जांच की ट्रायल कोर्ट से मिली अनुमति

जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में एक बार फिर जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है। ट्रायल (एसीबी) कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को इस मामले में अग्रिम जांच (Further Investigation) करने की अनुमति दे दी है। यह आदेश एसीबी की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पारित किया गया। एसीबी की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मदनमोहन नगायच ने कोर्ट में पक्ष रखा।

उल्लेखनीय है कि गहलोत सरकार के कार्यकाल में एसीबी ने इस मामले में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल सहित तीन सरकारी अधिकारियों को क्लीन चिट देते हुए प्रकरण को बंद कर दिया था। हालांकि, भजनलाल शर्मा सरकार बनने के बाद इस मामले की उच्च स्तर पर दोबारा विस्तृत जांच करने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में एसीबी ने ट्रायल कोर्ट से अग्रिम जांच की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

कोर्ट ने इस दौरान अभियोजन वापसी से जुड़े एक अन्य प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। दरअसल, गहलोत सरकार के समय 19 जनवरी 2021 को तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर और जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ अभियोजन वापस लेने का आवेदन एसीबी द्वारा दायर किया गया था। अब लगभग पांच साल बाद भजनलाल सरकार ने उस आवेदन को वापस लेने का प्रार्थना पत्र दायर किया, लेकिन एसीबी कोर्ट ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि वर्ष 2021 में ही उस आवेदन को न्यायालय द्वारा खारिज किया जा चुका है, ऐसे में उसे वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है।

यह मामला जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा 29 जून 2011 को गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम जारी किए गए एकल पट्टे से जुड़ा है। इस पट्टे को लेकर वर्ष 2013 में परिवादी रामशरण सिंह ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के बाद एसीबी ने तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, शैलेंद्र गर्ग सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान पेश किया था। बाद में 25 मई 2013 को विभाग ने उक्त एकल पट्टा निरस्त कर दिया था।

सरकार बदलने के बाद गहलोत शासनकाल में एसीबी ने तीन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर तीनों अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी और वर्ष 2021 में मामला वापस लेने का आवेदन भी दायर किया गया था, जिसे एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां 17 जनवरी 2023 को हाईकोर्ट ने सरकार के केस वापस लेने के फैसले को सही ठहराया। इस आदेश के खिलाफ अशोक पाठक ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मुख्य न्यायाधीश को स्वयं मामले की सुनवाई करने के निर्देश दिए, जिस पर अब हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।

अब ट्रायल कोर्ट से एसीबी को अग्रिम जांच की अनुमति मिलने के बाद इस प्रकरण में नए तथ्यों के सामने आने और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की दोबारा जांच होने की संभावना बढ़ गई है।

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