Saturday, 29 August 2026

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य को बताया समझदार नेता, कहा—ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए


शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य को बताया समझदार नेता, कहा—ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए

प्रयागराज। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सराहना करते हुए उन्हें एक समझदार और संवेदनशील नेता बताया है। प्रयागराज माघ मेले में चल रहे प्रशासनिक विवाद के बीच शंकराचार्य ने कहा कि डिप्टी सीएम यह समझते हैं कि अधिकारियों से गलती हुई है और इस मामले को अनावश्यक रूप से आगे बढ़ाने से सभी को नुकसान हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति समझदारी से स्थिति को संभाल सके, वही मुख्यमंत्री बनने योग्य होता है, न कि वह जो अकड़ और जिद पर अड़ा रहे।

गुरुवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करते हुए उनसे संगम स्नान करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि यदि किसी पूज्य संत या शंकराचार्य का अपमान हुआ है, तो उसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी बयान के बाद शंकराचार्य की यह प्रतिक्रिया सामने आई है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बीते पांच दिनों से प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। शुक्रवार सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार हो गया, जिसके चलते वे सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक वैनिटी वैन में दवाइयां लेकर आराम करते रहे। भीड़ जुटने पर वे बाहर आकर अपनी पालकी पर बैठे और श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।

माघ मेला प्रशासन से चल रहे टकराव के चलते शंकराचार्य ने बसंत पंचमी पर भी संगम स्नान नहीं किया। इससे पहले उन्होंने स्पष्ट कहा था कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक वे स्नान नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जब मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ, तो बसंत पंचमी का स्नान कैसे किया जा सकता है। दो नोटिस जारी होने के बाद प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने बसंत पंचमी के अवसर पर व्हीलचेयर के माध्यम से त्रिवेणी संगम में स्नान किया। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में सवा लाख मिट्टी के शिवलिंग स्थापित करने के उद्देश्य से आए थे, लेकिन मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के कारण वे यह कार्य नहीं कर सके।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कहा था कि किसी को भी परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है और कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। इन बयानों के बीच शंकराचार्य और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब राजनीतिक और धार्मिक विमर्श का विषय बन गया है।

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