



जोधपुर। राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध निर्माण से हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हाइवे की मध्य रेखा (सेंटर लाइन) से 75 मीटर के भीतर किया गया कोई भी निर्माण कानूनन अवैध है और ऐसे सभी ढांचों को निर्धारित समय सीमा में हटाना अनिवार्य होगा। अदालत ने कहा कि नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण सीधे तौर पर मानव जीवन के लिए खतरा बन रहे हैं और इन्हें किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ जोधपुर रिंग रोड क्षेत्र में स्थित धर्मकांटों और रॉयल्टी नाकों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी, जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और एनएचएआई की ओर से पेश पत्रों में बताया गया कि कई स्थानों पर सड़क सीमा के भीतर बिना किसी अनुमति के धर्मकांटे स्थापित कर दिए गए हैं। इससे यातायात बाधित हो रहा है और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है।
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ऐसे ही एक अवैध निर्माण स्थल से लगभग 300 मीटर की दूरी पर हुई सड़क दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसे गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध ढांचे केवल यातायात में बाधा ही नहीं बनते, बल्कि जानलेवा हादसों का कारण भी बन रहे हैं।
खंडपीठ ने 20 जनवरी 2026 को दिए गए अपने पूर्व आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश किसी भी तरह से अवैध निर्माण को वैध नहीं बनाता। कोर्ट ने दो टूक कहा कि नियमों के विरुद्ध किया गया कोई भी निर्माण कानूनन गलत है और यदि ऐसे ढांचे बने रहेंगे तो उन्हें हटाना ही पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया कि दो सप्ताह के भीतर सभी अवैध निर्माण हटा दिए जाएंगे। हाईकोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि 6 फरवरी 2026 तक सभी अवैध निर्माण हटाए जाएं। यदि तय समय तक ऐसा नहीं किया गया, तो जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभाग 9 फरवरी 2026 तक स्वयं कार्रवाई कर अवैध ढांचों को हटाना सुनिश्चित करेंगे।