



जयपुर। एनएसयूआई (NSUI) की प्रदेश इकाई में आंतरिक राजनीति एक बार फिर सतह पर आ गई है। NSUI प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ को बिना अनुमति नियुक्तियां करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उनसे दो दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। खास बात यह है कि नोटिस की भाषा को लेकर भी संगठन के भीतर असंतोष देखा जा रहा है, जिसमें यह तक लिखा गया है कि जवाब संतोषजनक नहीं होने की स्थिति में उन्हें पद से हटाने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। इसे लेकर छात्र संगठन और कांग्रेस से जुड़े हलकों में तीखी चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, यह नोटिस केवल प्रशासनिक अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे संगठन की अंदरूनी सियासत जुड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं। जाखड़ को कांग्रेस नेता और NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार का करीबी माना जाता है, जिसे लेकर भी संगठन के एक धड़े में असहजता बताई जा रही है। यही कारण माना जा रहा है कि जाखड़ को काफी समय से जानबूझकर नियुक्तियां करने और अहम फैसले लेने से रोका जा रहा था।
हाल ही में, राष्ट्रीय अध्यक्ष के कहने पर विनोद जाखड़ ने एक महासचिव की नियुक्ति की थी। इसके बाद, लंबे समय से रुकी हुई संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से जाखड़ ने कुछ सक्रिय और मेहनती कार्यकर्ताओं को पदों पर नियुक्त कर दिया। सूत्रों का कहना है कि संगठन के भीतर कुछ लोगों को इसी मौके की तलाश थी और जैसे ही नियुक्तियां की गईं, तुरंत नोटिस जारी कर दिया गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम NSUI में नेतृत्व संघर्ष और शक्ति संतुलन की लड़ाई को उजागर करता है। नोटिस के जरिए प्रदेश अध्यक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि संगठन पर नियंत्रण मजबूत किया जा सके। वहीं, जाखड़ समर्थक इसे एकतरफा कार्रवाई और संगठनात्मक लोकतंत्र के खिलाफ कदम बता रहे हैं।
फिलहाल, विनोद जाखड़ द्वारा नोटिस का जवाब दिए जाने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मामला संगठनात्मक अनुशासन तक सीमित रहता है या फिर यह विवाद और गहराता है। लेकिन इतना तय है कि इस नोटिस ने NSUI और कांग्रेस की छात्र राजनीति में नई सियासी हलचल पैदा कर दी है।
