Sunday, 01 March 2026

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: केवल गाली देना SC-ST एक्ट के तहत अपराध नहीं, जातिगत अपमान का इरादा साबित होना जरूरी


सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: केवल गाली देना SC-ST एक्ट के तहत अपराध नहीं, जातिगत अपमान का इरादा साबित होना जरूरी

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सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी एससी-एसटी व्यक्ति को केवल गाली देना अपने-आप में SC-ST एक्ट के तहत दंडनीय अपराध नहीं है, जब तक यह साबित न हो कि गाली विशेष रूप से उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने के इरादे से दी गई थी।
जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी होना मात्र पर्याप्त नहीं है। एफआईआर और चार्जशीट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कथित कृत्य जातिगत अपमान के उद्देश्य से किया गया।
अदालत ने पटना हाईकोर्ट के 15 फरवरी 2025 के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट दोनों ने SC-ST एक्ट की धाराओं 3(1)(r) और 3(1)(s) को गलत तरीके से लागू किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार कर आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी।

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