Saturday, 29 August 2026

जर्जर स्कूल भवनों पर हाईकोर्ट सख्त: ‘आग से न खेलें अधिकारी’, शिक्षा सचिव सहित शीर्ष अफसर 2 फरवरी को तलब


जर्जर स्कूल भवनों पर हाईकोर्ट सख्त: ‘आग से न खेलें अधिकारी’, शिक्षा सचिव सहित शीर्ष अफसर 2 फरवरी को तलब

जयपुर। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद भी प्रदेश में जर्जर भवनों में स्कूलों का संचालन जारी रहने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक जैन की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि विभागीय अधिकारी आग से न खेलें। अदालत ने स्पष्ट किया कि जर्जर भवनों में कक्षाएं संचालित करने पर पहले ही पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा चुका है, इसके बावजूद बूंदी जिले के भैंसखेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने की घटना बेहद गंभीर है।

हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए शिक्षा सचिव, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को 2 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जुलाई 2025 में झालावाड़ जिले में स्कूल भवन गिरने से सात बच्चों की मौत के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

टेक्निकल सर्वे के बाद भी सवालों के घेरे में विभाग

मामले में न्यायमित्र तन्मय ढंढ ने अदालत को बूंदी स्कूल हादसे की जानकारी दी। कोर्ट ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि झालावाड़ हादसे के बाद सरकार ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों का प्रारंभिक सर्वे कराया था, जिसमें सामने आया था कि करीब 86 हजार क्लासरूम जर्जर हालत में हैं। उसी दिन हाईकोर्ट ने इन क्लासरूम में पढ़ाई पर रोक लगा दी थी और बाद में विभाग ने टेक्निकल सर्वे भी कराया।

अदालत ने पूछा कि बूंदी के जिस स्कूल की छत गिरी, उसे टेक्निकल सर्वे में किस श्रेणी में रखा गया था? यदि वह जर्जर श्रेणी में था, तो वहां कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं? इसके अलावा, इतने महीनों में सरकार ने जर्जर कक्षाओं की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए, इसका भी जवाब मांगा गया है।

दो बड़े हादसों ने बढ़ाई चिंता

उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई को झालावाड़ जिले के मनोहरथाना ब्लॉक स्थित पिपलोदी सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 छात्रों की मौत हो गई थी और 21 बच्चे घायल हुए थे। वहीं, 13 जनवरी को बूंदी जिले में एक सरकारी स्कूल के बरामदे की करीब 50 फीट लंबी छत अचानक गिर गई। गनीमत यह रही कि उस समय बच्चे कक्षा में नहीं थे और धूप में बैठकर पढ़ रहे थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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