Thursday, 05 March 2026

ऑनलाइन राजस्व वाद व्यवस्था के विरोध में राजस्थान राजस्व अभिभाषक संघ अजमेर का आंदोलन, 21 से 23 जनवरी तक न्यायिक कार्य के बहिष्कार का निर्णय


ऑनलाइन राजस्व वाद व्यवस्था के विरोध में राजस्थान राजस्व अभिभाषक संघ अजमेर का आंदोलन, 21 से 23 जनवरी तक न्यायिक कार्य के बहिष्कार का निर्णय

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राजस्थान राजस्व बार संघ अजमेर की मंगलवार को आयोजित साधारण सभा में राज्य सरकार द्वारा अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों—उपखण्ड अधिकारी एवं सहायक जिला अधिकारी स्तर पर वाद एवं प्रकरणों को ऑनलाइन प्रस्तुत करने के निर्णय का कड़ा विरोध किया गया। बार संघ ने स्पष्ट किया कि 12 जनवरी को लिया गया यह निर्णय रेवेन्यू कोर्ट मैन्युअल में बिना किसी संशोधन या परिवर्तन के लागू किया गया है, जो न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। संघ का कहना है कि इस प्रकार की महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू करने से पूर्व राजस्थान के समस्त राजस्व अभिभाषक संघों के अध्यक्षों से समुचित संवाद और विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था।

साधारण सभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस व्यवस्था के विरोध में 21 जनवरी 2026 से 23 जनवरी 2026 तक सांकेतिक रूप से न्यायिक कार्य से विरत रहा जाएगा। इसके साथ ही राजस्थान राजस्व अभिभाषक संघ अजमेर ने यह भी तय किया कि जिला स्तर की समस्त बार एसोसिएशनों को इस नई ऑनलाइन व्यवस्था के विरोध में पत्र प्रेषित किया जाएगा, ताकि वे अपने-अपने जिलों में स्थित उपखण्ड अधिकारी स्तर की बार एसोसिएशनों को सूचित कर संयुक्त रूप से विरोध दर्ज कर सकें।

सभा में यह भी निर्णय हुआ कि 27 जनवरी 2026 को आगामी रणनीति तय करने के लिए राजस्थान राजस्व अभिभाषक संघ अजमेर की पुनः साधारण सभा आहूत की जाएगी। उस बैठक के बाद आगामी आंदोलन की दिशा को लेकर विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाएगी। तब तक संघ के अधिवक्ता पूर्ण रूप से न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।

साधारण सभा के समापन के पश्चात बार के सभी सदस्यों ने राजस्व मंडल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से वापस लेने अथवा इसमें आवश्यक संशोधन कर अभिभाषकों से संवाद स्थापित करने की मांग की।

मंगलवार की साधारण सभा में वीरेन्द्र सिंह राठौड़, सुरेन्द्र कुमार शर्मा, सोहनपाल सिंह चौधरी, वीपी सिंह राजावत, अनिल शर्मा, राजेन्द्र सिंह बराड़, धर्मेन्द्र सिंह टाक, देशराज मेहरा, करण सिंह रावत, नीरज मेहरा, कुलदीप ढिल्लीवाल, अमन झंवर सहित अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने विचार रखे और एकजुट होकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

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