



नगर की अग्रणी सांस्कृतिक संस्था कला अंकुर की स्थापना के गौरवशाली तीन दशक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अकादमी का वार्षिकोत्सव ‘उपलब्धि’ कार्यक्रम भव्य रूप से आयोजित किया गया। यह आयोजन कला अंकुर के स्थापना दिवस 20 जनवरी को सायं 4.30 बजे स्थानीय सूचना केन्द्र सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में गीत, संगीत, नृत्य और अभिनय की सजीव प्रस्तुतियों के माध्यम से कला अंकुर की 30 वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा और युवा प्रतिभा प्रोत्साहन के संकल्प को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. शान्तनु, उज्ज्वल एवं ललित मिश्रा ने बताया कि संपूर्ण कार्यक्रम अकादमी के शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा तैयार एवं प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर पाश्चात्य संगीतज्ञ श्री पीटर डेविड, शास्त्रीय गायक आनंद वैद्य एवं कथक नृत्यांगना श्रीमती कुसुम माथुर विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रायोजक मै. एस.एल.आर. सोलर एवं सुनील सोनी, पूनम होटल, अजमेर रहे।
मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अध्यक्ष अनिता बाल्दी ने अतिथियों, अभिभावकों और कला प्रेमियों का स्वागत किया। इसके बाद ‘मां सरस्वती शारदे’ पर यश्वी और ऋत्वी ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। कला अंकुर गीत ‘कला अंकुरे तव स्वागतम’ की सामूहिक प्रस्तुति ने वातावरण को संगीतमय बना दिया।

कार्यक्रम में शास्त्रीय, सुगम और पाश्चात्य संगीत की प्रभावशाली प्रस्तुतियां हुईं। राग यमन, ‘आपकी नज़रों ने’, ‘आने वाला पल’, ‘देखा एक ख़्वाब’, ‘ओ सजना बरखा बहार’, ‘चंदन सा बदन’ सहित अनेक गीतों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अकादमी के सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और सदस्यों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों की सजी गीतमाला रही, जिसने सभागार को राष्ट्रप्रेम के भाव से भर दिया।
नृत्य प्रस्तुतियों में कथक और समकालीन नृत्य का सुंदर संगम देखने को मिला। ‘मैंने पायल है’, ‘पिया तोसे नैना’ और ‘मलंग’ जैसे गीतों पर विद्यार्थियों की सशक्त प्रस्तुतियों ने खूब तालियां बटोरीं। वाद्य संगीत में ऑर्गन और गिटार पर पाश्चात्य धुनों के साथ ‘चुरा लिया है तुमने’ गीत की प्रस्तुति भी सराही गई।
कार्यक्रम में एक हास्य-व्यंग्य नाटक ‘उज्ज्वल भविष्य’ का मंचन किया गया, जिसमें यह संदेश दिया गया कि पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ संगीत, नाटक और नृत्य जैसी कलाएं भी आजीविका का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। नाटक का निर्देशन उज्ज्वल मित्रा ने किया।
अकादमी प्राचार्य श्रीमती अंजना बोगावत ने कला अंकुर की स्थापना और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संरक्षक श्री अनिल जैन ने कहा कि गीत, संगीत, नृत्य और अभिनय आज के डिजिटल युग में व्यक्तित्व विकास, टीमवर्क और तनाव नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। विशिष्ट अतिथियों ने भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत की महत्ता पर विचार साझा किए।