



जयपुर। वेदांता द्वारा प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल (JLF) के चौथे दिन भी गंभीर विचार-विमर्श और वैश्विक संवाद की श्रृंखला जारी रही। साहित्य, राजनीति, क़ानून, नेतृत्व और तकनीक से जुड़ी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आवाज़ें एक मंच पर आईं और उन कहानियों व विचारों पर चर्चा की, जो आज की दुनिया को आकार दे रही हैं। सत्ता और न्याय की जटिलताओं से लेकर डिजिटल भविष्य की संभावनाओं तक, सत्रों में गहन, बहुआयामी और समकालीन मुद्दों पर सार्थक बातचीत देखने को मिली।
इससे पहले फेस्टिवल के तीसरे दिन कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास के साथ एक बहुप्रतीक्षित सत्र हुआ, जिसने खचाखच भरे सभागार को पूरी तरह बांधे रखा। दास ने दुख और मानवीय संवेदनाओं पर बात करते हुए कहा कि दुख उस स्थिति जैसा है, जब इंसान पूरी तरह सांस नहीं ले पाता। उन्होंने इसे उस अनुभव से जोड़ा, जब कोई व्यक्ति जो पहले हमारे बाहर था, धीरे-धीरे हमारे भीतर बसने लगता है और उसकी अनुपस्थिति शरीर व मन दोनों को प्रभावित करती है। उनके विचारों में हास्य के साथ गहरी भावनात्मक समझ भी झलकी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
चौथे दिन के सत्रों में लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था, नेतृत्व की नैतिकता और तकनीक के प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि तेजी से बदलती दुनिया में संवाद और विचारों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। डिजिटल युग में अभिव्यक्ति, जवाबदेही और मानवीय मूल्यों को संतुलित रखने की चुनौती पर भी गहन विमर्श हुआ।
जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल का यह दिन एक बार फिर इस बात का प्रमाण बना कि यह महोत्सव केवल साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समकालीन समाज, राजनीति, संस्कृति और भविष्य की दिशा तय करने वाले विचारों का एक सशक्त वैश्विक मंच है। चौथे दिन की चर्चाओं ने दर्शकों को सोचने, सवाल करने और नए दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे JLF की वैचारिक समृद्धि और भी सुदृढ़ हुई।